महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण शिखर पर है। व्यवस्था लगातार संकट से लड़ने का दावा कर रही है। फिर भी कोरोना के डरावने आंकड़े थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और मौतों का सिलसिला भी नहीं रुक रहा है।
देश में कोरोना के कुल मरीजों में से 40 फीसदी मरीज महाराष्ट्र में हैं। राज्य में कोरोना संक्रमितों की आंकड़ा 60 हजार पार हो चुका है। सबसे अधिक 33 फीसदी मौत हो चुकी हैं। 6 लाख से अधिक क्वारंटीन हैं।
बीते 13 दिनों से लगातार हर दिन 2 हजार नए मरीज मिल रहे हैं। प्रतिदिन 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं जिससे कोरोना पॉजिटिव पुलिसकर्मियों की संख्या 2100 के पार पहुंच गई है।
जबकि 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। ऐसी स्थिति में भी राज्य के मंत्री अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी। लेकिन, केंद्र से आपदा राहत के तहत मिले 1600 करोड़ के खर्च का आंकड़ा देखें तो ठाकरे सरकार की पोल खुल जाती है।
सरकार इसमें से अभी तक 172 करोड़ ही खर्च कर पाई है जबकि 154 करोड़ का प्रस्ताव वित्त विभाग में है। विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस का दावा है कि विभिन्न मदों में केंद्र ने महाराष्ट्र को 28,104 करोड़ रुपये दिए।
वहीं, आपदा खर्च में कंजूसी के सवाल पर आपदा प्रबंधन विभाग मंत्री विजय वड़ेट्टीवार कहते हैं कि कोरोना के लिए केंद्र ने एक पैसा नहीं दिया है। आपदा निधि का 35 फीसदी ही खर्च हो सकता है। इसलिए रकम खर्च नहीं हो सकी।
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये कहते हैं कि कोरोना का जो कहर मुंबई में है वहीं मुंबई के बाहर भी है। औरंगाबाद, पुणे, ठाणे और सोलापुर सहित हर जिले में मामले बढ़ रहे हैं।
ग्रीन जोन भी रेड जोन में तब्दील होते जा रहे हैं। राज्य सरकार देख ही नहीं रही है। कितने दिन तक लॉकडाउन रहेगा। एक सप्ताह बाद बारिश शुरू हो जाएगी।
उसके बाद हालत और खराब हो सकती है। लेकिन ग्राउंड पर कुछ नहीं हो रहा है।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी मंत्री अनिल परब कहते हैं कि महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना को मात देने के लिए टास्कफोर्स गठित की है।
टास्कफोर्स कोविड-19 के विश्वस्तरीय शोधों पर अध्ययन कर डॉक्टरों का मार्गदर्शन कर रही है। यही वजह है कि राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने की संख्या 31.26 फीसदी से अधिक है।