कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन के चलते कारखानों में काम करने वाले मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। रोटी और रोजी दोनों पर संकट होने के कारण मुंबई से सटे डोंबिवली से 231 मजदूरों का जत्था पैदल ही उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रवाना हो गया।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पलायन की खबर पर पुलिस की कान खड़े हो गए। आनन-फानन में पुलिस की टीम ने मजदूरों को कल्याण के दुर्गाड़ी किले के पास इन मजदूरों को रोक लिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को ही दूसरे राज्यों के मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की थी। उसके दूसरे ही दिन मुंबई से सटे कल्याण से मजदूरों ने पैदल गांव की राह पकड़ ली। ये मजदूर डोंबिवली एमआईडीसी क्षेत्र में काम करते थे।
लॉकडाउन के चलते सारी कंपनियां बंद हो गई हैं। उनके पास खाने के पैसे भी नहीं बचे। इसलिए मजदूरों के गांव की राह पकड़ी। कल्याण पुलिस ने मजदूरों को दुर्गाड़ी किले पर रोकने के बाद मेडिकल जांच के लिए ले गई।
कल्याण के सुभाष मैदान पर मजूदरों का मेडिकल परीक्षण शुरू कराया गया। उसके बाद उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा। एक मजदूर राजन गोस्वामी ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से हम सभी बेरोजगार हो गए हैं। हमारे पास खाने के लिए भी पैसे नहीं है। इसलिए हम सबने गांव जाने का निर्णय लिया है।
एसीपी अनिल पोवार का कहना है कि एमआईडीसी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर एक-एक कमरे में 40-40 लोग रहते हैं। कंपनियां बंद होने से सभी बेरोजगार हो गए हैं। अब इनके सामने दो जून की रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। इसलिए ये सभी पैदल पलायन कर रहे थे। इन सभी को हिरासत में ले कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।