पुलिस को मानवीय बनाने के लंबे चौड़े दावे हवा हवाई ही साबित हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस के बेरहम रवैये का नजारा एक बार फिर देखने को मिला।
प्रदेश के करेरा कस्बे के पास खैराकोटिया गांव की महिलाएं और पुरुष सड़क जाम कर एक व्यक्ति की हत्या का मामला दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन कर रही थीं।
पुलिस के ढुलमुल रवैये से नाराज भीड़ आक्रोशित हो गई और हाथापाई की नौबत आ गई। इस दौरान एक पुलिस अधिकारी ने आपा खो दिया और एक महिला की जमकर पिटाई कर डाली।
पुलिस के अनुसार, एक 48 वर्षीय व्यक्ति की 11-12 जुलाई की रात को घर लौटते वक्त हत्या कर दी गई। घटना के वक्त मृतक अपनी पत्नी और बेटी के साथ वापस आ रहा था।
परिवार ने जमीन विवाद को लेकर कुछ लोगों पर हत्या का आरोप लगाया। पुलिस द्वारा नामित आरोपों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने पर ग्रामीणों ने शव को लेकर सड़क जाम कर दी।
हंगामे की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारिक घटना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से जाम हटाने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस ने शव को सड़क से जबरन हटाने की कोशिश की तो मृतक के परिवार की एक महिला ने इसका विरोध किया।
इस पर एक पुलिसकर्मी ने उसकी गर्दन पकड़कर जमकर पिटाई कर दी। यह पूरा वाकया कैमरे पर कैद हो गया। इस घटना के टेलीविजन पर प्रसारण के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई।
हालांकि पुलिस का दावा है कि वह केवल महिला को घटना स्थल से हटा रही थी और उसकी पिटाई का आरोप गलत है।
प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया वहां पर कुछ चूक नजर आ रही है। पुलिस से इस मामले की रिपोर्ट मांगी गई है।