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Bageshwar: 'कथावाचक का बेटा कथा बांचे तो आपत्ति क्यों?' देवकीनंदन ठाकुर के बेटे की ट्रोलिंग पर बोले शास्त्री

Sun, 12 Jul 2026 10:26 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

तिरुपति में ऊर्जा संचय समागम के दौरान बागेश्वर सरकार ने युवा कथा व्यास देवांश ठाकुर को सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कथा वाचक का पुत्र कथा सुनाए तो इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से आपसी मतभेद छोड़कर सनातन की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

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बाबा बागेश्वर
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विस्तार
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आंध्र प्रदेश के पवित्र तीर्थस्थल तिरुपति बालाजी में आयोजित तीन दिवसीय ऊर्जा संचय समागम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर सरकार) ने हिंदू समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए सोशल मीडिया पर युवा कथा व्यास देवांश ठाकुर को ट्रोल किए जाने पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अपने ही संतों और कथा वाचकों का उपहास करना सनातन समाज को कमजोर करने जैसा है।
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बागेश्वर सरकार ने कहा कि आज सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हिंदू ही हिंदुओं का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "यदि किसी डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है, किसान का बेटा किसान, पुलिसकर्मी का बेटा पुलिसकर्मी, नेता का बेटा नेता और अभिनेता का बेटा अभिनेता बन सकता है, तो कथा वाचक का पुत्र कथा वाचक बने, इसमें आपत्ति कैसी?"

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उन्होंने वृंदावन के प्रसिद्ध कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर के बड़े पुत्र देवांश ठाकुर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कथा वाचन शुरू किया है और उनकी वाणी की लोग सराहना भी कर रहे हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं और अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं। बागेश्वर सरकार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि किसी को किसी कथा वाचक की शैली पसंद नहीं है तो वह उसकी कथा सुनने न जाए, लेकिन सार्वजनिक रूप से संतों और सनातन परंपरा का उपहास करना उचित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि अपने ही संतों, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं पर लगातार आक्षेप करना अंततः सनातन समाज को ही नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि आपसी मतभेद और खींचतान छोड़कर एक-दूसरे का सम्मान करें तथा सनातन धर्म की गरिमा बनाए रखने के लिए एकजुट रहें। अंत में बागेश्वर सरकार ने हिंदू एकता का संदेश देते हुए कहा, "जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई। हम सब एक परमपिता परमात्मा की संतान हैं।" उन्होंने कहा कि जब हिंदू समाज संगठित होगा, तभी सनातन परंपरा और राष्ट्र दोनों अधिक मजबूत बनेंगे।
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