खेत की सुरक्षा के लिए बिछाया करंट बना चीतल की मौत का कारण, वन विभाग की जांच शुरू
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े धमोखर वन परिक्षेत्र के महामन गांव में खेत की सुरक्षा के लिए लगाया गया बिजली का करंट एक वन्यजीव की मौत का कारण बन गया। जंगल से भटककर खेत की ओर पहुंचे करीब दो साल के चीतल की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। विभागीय अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, महामन गांव में किसी खेत की सुरक्षा के लिए जीआई तार लगाया गया था। आरोप है कि इस तार में करंट प्रवाहित किया गया था, ताकि खेत में जंगली जानवर प्रवेश न कर सकें। इसी दौरान जंगल से भटककर चीतल खेत की ओर पहुंच गया। खेत के चारों ओर लगाए गए तार के संपर्क में आते ही वह करंट की चपेट में आ गया। करंट इतना घातक था कि चीतल को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
ये भी पढ़ें-
भोपाल में बड़ा हादसा: आईएसबीटी परिसर में खड़ी आधा दर्जन एसी बसों में भीषण आग, कई दमकलें मौके पर
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे। मृत चीतल का नियमानुसार परीक्षण कराया गया। पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया, जिसके बाद वन विभाग की मौजूदगी में चीतल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि खेत किसका है और तार में करंट किसने प्रवाहित किया था। धमोखर परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सिंह ने बताया कि खेत मालिक की पहचान की जा रही है। मामले की जांच जारी है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का क्षेत्र वन्यजीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघों के साथ चीतल सहित कई अन्य वन्यजीव प्राकृतिक आवास में विचरण करते हैं। जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों का खेतों तक पहुंचना असामान्य नहीं है। ऐसे में फसलों की सुरक्षा के लिए यदि तारों में अवैध रूप से करंट प्रवाहित किया जाता है, तो यह वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।