उमरिया जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम अखड़ार के शासकीय विद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था और भवन निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। विद्यालय की बारहवीं कक्षा की छत से अचानक प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिरने से दो से तीन छात्र घायल हो गए। हादसे में लवकुश गुप्ता नामक छात्र को गंभीर चोटें आई हैं। उसके सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों में फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य घायल छात्रों को मामूली चोटें आई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और घायल छात्र के अनुसार वह बाथरूम से लौटकर कक्षा में पहुंचा ही था कि अचानक छत का भारी प्लास्टर उसके ऊपर आ गिरा। घटना के बाद कक्षा में अफरा-तफरी मच गई और छात्र जान बचाने के लिए बाहर भागे। यदि हादसे के समय अधिक छात्र उसी स्थान पर बैठे होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना के बाद सबसे गंभीर आरोप यह है कि विद्यालय प्रबंधन ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि प्राचार्य ने घायल छात्रों का तत्काल उपचार तो कराया, लेकिन इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को नहीं दी। परिजनों के स्कूल पहुंचने पर भी उन्हें इलाज की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन देकर मामला शांत कराने का प्रयास किया गया। यही वजह रही कि जिला शिक्षा अधिकारी तक भी इस घटना की जानकारी समय पर नहीं पहुंच सकी।
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हादसे के बाद सामने आई तस्वीरों में कक्षा की छत का करीब पांच फीट से अधिक हिस्सा टूटा हुआ दिखाई दे रहा है। कमरे के भीतर प्लास्टर और मलबे के बड़े-बड़े टुकड़े पड़े हुए हैं। घटना के बाद एहतियात के तौर पर बारहवीं कक्षा को दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया है।
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विद्यालय के प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि जब भवन क्षतिग्रस्त था तो उसमें कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि प्राचार्य का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने विद्यालय भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन करीब पांच वर्ष पहले ही बनाया गया था। इतनी कम अवधि में छत का प्लास्टर गिरना निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ता में कमी की ओर संकेत करता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन का निरीक्षण और मरम्मत कराई जाती तो इस हादसे से बचा जा सकता था।
अब अभिभावकों और ग्रामीणों ने पूरे विद्यालय भवन की तकनीकी जांच कराने, दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने तथा सभी जर्जर कक्षों का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।