उमरिया जिला पंचायत ने लोकायुक्त ट्रैप में रंगे हाथ पकड़े गए पंचायत सचिव को पुनः सचिवीय कार्य सौंप दिया है। इस निर्णय पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता त्रिभुवन सिंह ने पंचायत के इस फैसले को प्रशासनिक गिरावट का प्रतीक बताया है। मामला सामने आने के बाद बड़ागांव पंचायत के ग्रामीणों ने भी इस नियुक्ति का विरोध करते हुए रामू सोनी को हटाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
24 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त संगठन रीवा की टीम ने पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद के निर्देश पर उमरिया में ट्रैप कार्रवाई की थी। ग्राम पठारी कला निवासी नत्थूलाल बैगा ने शिकायत की थी कि उनके दिवंगत पुत्र राजकुमार बैगा की मृत्यु आकाशीय बिजली गिरने से 2019 में हुई थी। उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के बदले ग्राम पंचायत सचिव रामू प्रसाद सोनी ने 5,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत का सत्यापन होने के बाद लोकायुक्त ने टीम गठित कर आरोपी रामू सोनी को रिश्वत लेते हुए उमरिया के पुराने बस स्टैंड के सामने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रैप के कुछ ही महीनों बाद जिला पंचायत उमरिया ने 3 जुलाई को आदेश जारी कर रामू सोनी को ग्राम पंचायत बड़ागांव (जनपद पंचायत करकेली) में सचिवीय दायित्व सौंप दिया। 7 जुलाई को रामू सोनी ने नए पद पर कार्यभार भी ग्रहण कर लिया।
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इस नियुक्ति पर कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस नेता त्रिभुवन सिंह ने कहा कि यह फैसला उन तमाम ग्रामीणों के साथ धोखा है जो ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं। एक भ्रष्ट अधिकारी को दोबारा पद देना, सरकार की कथनी और करनी में अंतर को उजागर करता है। मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने कहा, ऑफिस मुझे चलाना है। उनकी यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कितनी लापरवाही बरती जा रही है।
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