फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Umaria News: पंचतत्व में विलीन हुईं जोधइया अम्मा, कलेक्टर-एसपी ने दिया कंधा

Mon, 16 Dec 2024 08:58 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

सार

पद्मश्री बैगा चित्रकार जोधड्या बाई का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने बैगा कला को विश्वभर में पहचान दिलाई। कला जगत के लिए यह अपूरणीय क्षति है। उनके अंतिम संस्कार में प्रशासनिक और सामाजिक हस्तियां शामिल हुईं। 

विज्ञापन
पंच तत्व में विलीन हुई जोधईया अम्मा कलेक्टर एसपी ने दिया कंधा
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उमरिया जिले की शान और सुप्रसिद्ध बैगा चित्रकार पद्मश्री जोधड्या बाई का 86 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद रविवार को उनके गृह ग्राम लोढ़ा में निधन हो गया। जोधड्या बाई ने शिक्षा के अभाव के बावजूद 70 वर्ष की आयु में चित्रकला सीखकर बैगा कला को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके निधन से जिले, प्रदेश और कला जगत में शोक की लहर है।
विज्ञापन


कला में अद्वितीय योगदान
जोधड्या बाई को मशहूर चित्रकार आशीष स्वामी ने चित्रकला का प्रशिक्षण दिया। उनकी मेहनत और लगन से बैगा चित्रकला को विश्व स्तर पर पहचान मिली। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को जीवंत रखा। उन्हें वर्ष 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रीय नारीशक्ति सम्मान और 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रशासन और समाज ने दी श्रद्धांजलि
उनके अंतिम संस्कार में उमरिया के कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन, एसपी निवेदिता नायडू, और जिले के कई प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कलेक्टर और एसपी ने स्वयं उन्हें कंधा दिया। पूर्व जेल मंत्री और पूर्व सांसद ज्ञान सिंह ने भी अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन


कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने कहा, "यह देश और प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। जोधड्या बाई की कला आज पूरे देश में प्रसिद्ध है। उनकी कला और योगदान उन्हें हमेशा जीवित रखेंगे।" एसपी निवेदिता नायडू ने कहा, "जोधड्या बाई ने नई पीढ़ी को बैगा कला से प्रेरित किया और इस क्षेत्र को एक अमूल्य विरासत सौंपी।"

देर से शुरू की कला यात्रा
70 वर्ष की उम्र में चित्रकला सीखने के बाद जोधड्या बाई ने दुनियाभर में बैगा कला का परचम लहराया। 84 वर्ष की उम्र में उन्हें पहला बड़ा सम्मान मिला। पैरालिसिस और अन्य बीमारियों से लंबे समय तक जूझने के बाद रविवार को उनका निधन हो गया। जोधड्या बाई के योगदान को भुलाना संभव नहीं। उनके कार्य और बैगा चित्रकला को दिया गया जीवनदान सदैव प्रेरणा बने रहेंगे।
विज्ञापन

 

पंच तत्व में विलीन हुई जोधईया अम्मा कलेक्टर एसपी ने दिया कंधा

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें