उमरिया-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दुनिया में अपनी अलग ही पहचान बना रखा है। चाहे बाघों की बढ़ते संख्या को देखा जाए या टाइगर साइटिंग में और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पार्क बाउंड्री के किनारे ज्यादातर बसे गांव पर लोग निवासरत हैं।
इन सभी गांव में निवास करने वाले ग्रामीणों ने मवेशियों का रखाव ज्यादातर करते हैं। लेकिन इन पालतू मवेशियों को चरानें के लिए जंगल की ओर जाते हैं। तभी जंगली जानवर जैसे टाइगर, लेपर्ड आदि मांसाहारी जानवर इन मवेशियों को अपना निवाला बनाते हैं। इसी बीच चरवाहों ने उन मवेशियों को उपरोक्त जानवरों से छुड़ाने के लिए दौड़ पडते हैं। इसी बीच मवेशियों को छोड़ टाइगर चरवाहों पर हमला कर देता है और ऐसे कहीं मामलें हो भी चुके हैं। आए दिन देखने को मितली भी हैं।
प्रबंधन की सराहनीय पहल
आगे ऐसे ही कोई अप्रिय घटना न घटे, इसलिए बांधवगढ़ प्रबंधन द्वारा बीते दिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर रेंज के समीप रहने वाले गांव, मढ़ऊ, मझखेता, देवरी, बड़खेरा, दमना, गाटा, घघौड़, मरई, मलहरा, समरकोईनी, बांसा, कछौहा आदि गांवों के चरवाहों एवं वन समितियों के अध्यक्षों एवं अन्य क्षेत्र से आये सभी ग्रामीणों का सरपंच और उपसरपंचों का मछखेता गांव में सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इन चरवाहों के सम्मेलन में पुरुष चरवाहों एवं महिला चरवाहों ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा के समक्ष अपनी-अपनी समस्याओं को साझा किया एवं पार्क प्रबंधन द्वारा भी शासकीय योजनाओं, मानव वन्य प्राणी द्वंद एवं वन व पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देते हुए चरवाहों को उपहार के रूप में छाता का वितरण किया गया। चरवाहे सम्मेलन में पहुंचे सभी लोगों को भोजन भी कराया गया। उपरोक्त चरवाहों के सम्मेलन में उपस्थित उप संचालक पीके वर्मा के साथ-साथ एसडीओ मानपुर बीएस उप्पल, परि क्षेत्राधिकारी मुकेश कुमार अहिरवार सभी बीट गार्ड एवं सुरक्षा श्रमिक शामिल रहे।
सम्मेलन का आयोजित करते अधिकारी