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उज्जैन के पुनीत का कमाल: 502 ग्राम का मीरा कैमरा अंतरिक्ष में पहुंचा, स्पेसएक्स के फैलकॉन-9 से लियो में एंट्री

Tue, 06 Oct 2026 07:52 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के युवा इंजीनियर पुनीत बदेका और उनकी डीपटेक स्टार्टअप EoN Space Labs ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है। टीम द्वारा विकसित 502 ग्राम का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा MIRA SpaceX के Transporter-18 मिशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया है।
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उज्जैन के युवा ने बनाया कैमरा - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उज्जैन के युवा इंजीनियर पुनीत बदेका और उनकी डीपटेक स्टार्टअप ईओएन स्पेस लैब्स (EoN Space Labs) ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी टीम द्वारा विकसित महज 502 ग्राम का अत्याधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा मीरा (MIRA) स्पेसएक्स (SpaceX) के ट्रांसपोर्टर-18 (Transporter-18) मिशन के जरिए सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित हो गया है। इसे अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से फाल्कन-9 (Falcon-9) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया।

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कौन-सी विशेषताएं कैमरे को बनाती हैं खास?
पुनीत ने बताया कि कैमरा मीरा की प्रमुख विशेषताएं और तकनीक इसे खास बनाती हैं। यह विदेशी स्पेस कैमरों की तुलना में 8 से 12 गुना हल्का है। इसका आकार पारंपरिक टेलिस्कोप से 3 से 4 गुना छोटा है और यह एक मोबाइल से भी छोटा है। इसका ऑप्टिकल आर्किटेक्चर ग्लास के एक ही टुकड़े (Single Piece of Glass) पर आधारित है, जो इसे मजबूती और उच्च इमेजिंग क्षमता प्रदान करता है। इसमें नौ मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड हैं और यह 9.2 मीटर के ग्राउंड रिजोल्यूशन में तस्वीरें लेने में सक्षम है। इसे भविष्य में 4 मीटर तक बेहतर करने का लक्ष्य है। मीरा के कॉम्पैक्ट इमेजिंग आर्किटेक्चर (A Miniaturized Telescope-Based Imaging System) के लिए ईओएन स्पेस लैब्स को हाल ही में भारतीय पेटेंट भी हासिल हुआ है।

यह काम आएगा कैमरा
पुनीत बदेका का कहना है कि यह कैमरा केवल तस्वीरें नहीं लेगा, बल्कि जमीन, फसलों और प्राकृतिक संसाधनों का सूक्ष्म वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा।

कृषि सेक्टर: खेतों में नमी, फसल का स्वास्थ्य, कीड़ों के प्रकोप का पता लगाने और पैदावार का सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा।

सीमा एवं समुद्री सुरक्षा: भारतीय सीमाओं पर संदिग्ध गतिविधियों, जहाजों की आवाजाही और तस्करी की निगरानी में इसका उपयोग किया जा सकेगा।

आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम जानकारी जुटाने के साथ ही खनन गतिविधियों की मैपिंग, सप्लाई चेन और इंश्योरेंस सेक्टर में डेटा विश्लेषण में भी यह उपयोगी होगा।

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असफलता से सफलता तक का सफर
मीरा को इससे पहले जनवरी 2026 में इसरो के पीएसएलवी-सी62 (PSLV-C62) मिशन के जरिए भेजा जाना था। हालांकि, तकनीकी गड़बड़ी के कारण पेलोड डिप्लॉय नहीं हो सका था, लेकिन उस दौरान इसके हार्डवेयर, स्पेसफ्लाइट पैकेजिंग और मैकेनिकल इंटीग्रेशन का परीक्षण सफल रहा। इसके बाद टीम ने हार्डवेयर को और बेहतर बनाया और स्पेसएक्स के साथ ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए इसे टेकमी 2 स्पेस (Takme2Space) के MOI-1A ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के साथ इंटीग्रेट कर अंतरिक्ष में भेजा। सैटेलाइट के माध्यम से अंतरिक्ष में पहुंचने के कारण यह कैमरा लगभग 500 किलोमीटर ऊपर स्थित वैक्यूम में 3 साल तक लगातार काम करता रहेगा।

पुनीत बदेका का सफर और विजन
उज्जैन की गुलमोहर कॉलोनी के रहने वाले पुनीत ने उज्जैन (MIT) से बीटेक करने के बाद इंदौर के प्रतिष्ठित SGSITS कॉलेज से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। उनके पिता मिथिलेश बदेका बिजनेसमैन हैं और भाई नर्सी मूंजी इंस्टीट्यूट (इंदौर) में पदस्थ हैं। एसजीएसआईटीएस में पढ़ाई के दौरान मिले मून रोवर चैलेंज ने अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी रुचि जगाई। भारत में ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी की कमी और करीब 11 बिलियन डॉलर के ऑप्टिक्स आयात को देखते हुए पुनीत ने 2022 में संजय कुमार और मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की नींव रखी। केवल 2 से 3 करोड़ रुपये के बजट में तैयार की गई इस तकनीक को टीम ने रिकॉर्ड 7 दिनों में बना दिया था। नीदरलैंड के वैज्ञानिकों से लेकर इंडियन नेवी तक ने इस स्वदेशी डिजाइन की सराहना की है।

पुनीत के अनुसार, अंतरिक्ष में स्थापित मीरा कैमरे से 10 अक्टूबर से पहली तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी। ईओएन स्पेस लैब्स की आगामी योजना इस कैमरे का वजन 502 ग्राम से भी कम करने और इसके ग्राउंड रिजोल्यूशन को 9.2 मीटर से सुधारकर 4 मीटर तक लाने की है, जिससे भारत की अंतरिक्ष निर्भरता पूरी तरह स्वदेशी और रियल-टाइम डेटा पर हो सके।

 

 

 

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