श्री राम जनार्दन मंदिर में भगवान श्री राम की जन्मपत्रिका के साथ ही इससे जुड़े अन्य चित्र मौजूद ह
प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी उज्जैन में भगवान राम ही नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण सहित कई देवी-देवताओं के आने और उनके कार्यों के प्रमाण मौजूद है। भगवान श्री राम का जन्म दिन यानी राम नवमी पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाई गई। यह बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि पूरी दुनिया में उज्जैन में ही भगवान राम की जन्म पत्रिका पुरातात्विक प्रमाण के साथ मौजूद है। इस जन्म पत्रिका के संदर्भों की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है।
उज्जैन के प्राचीन राम जनार्दन मंदिर में दीवारों पर मिले भित्ति चित्रों में भगवान राम की जन्म कुंडली में राम के जन्म और उनके योग की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से स्पष्ट होती है। राम जनार्दन मंदिर में बने राम मंदिर की दक्षिणी दीवार पर मराठा कालीन 300 वर्ष पुराने रामनवमी के चित्रों का वर्णन है। रामनवमी के इन चित्रों में राम के जन्म के समय अयोध्या का भव्य महल रानीवास देखने को मिलता है। देव मंडप के चित्र में तीनों माताएं कौशल्या, कैकई एवं सुमित्रा देखने को मिलती हैं। कौशल्या के हाथ में भगवान राम का स्वर्ण मुकुट धारी बाल स्वरूप भी देखने को मिलता है। दूसरे चित्र में भगवान राम के जन्मोत्सव पर अयोध्या के महल का भव्य स्वरूप है, जिसमें राजा दशरथ हाथ जोड़ते दिखाई देते हैं। सामने कुलगुरु वशिष्ठ बैठे हैं जो राम की जन्म पत्रिका का निर्माण स्वर्ण दवात से कर रहे हैं। गुरु वशिष्ठ और राजा दशरथ के साथ कुलगुरु शतादानंद जी बैठे हैं, जो श्री राम के जन्म एवं कालगणना उंगलियों पर करते दिखाई दे रहे हैं। इस चित्र में भगवान राम की जन्म पत्रिका अत्यंत स्पष्ट दिखाई देती है। उज्जैन के वरिष्ठ चित्रकार एवं माधव कॉलेज कला संकाय के पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ. श्री कृष्ण जोशी का इन चित्रों पर गहन अध्ययन है।
विक्रम विश्वविद्यालय के चित्रकला शोधार्थी तिलक राजसिंह सोलंकी ने बताया कि भगवान राम की चित्रित जन्म कुंडली के अनुसार वह पत्रिका कर्क लग्न की है। इसमें हमें कई महत्वपूर्ण योग दिखाई देते हैं। शंख योग है, जो एक आदर्श नायक का चरित्र बनता है। लक्ष्मी योग भी है जो अथाह धन संपत्ति और राज वैभव दिखाता है। भगवान राम की जन्म कुंडली में दुर्वारशत्रु मारक योग भी है जो नायक को अत्यंत पराक्रम एवं शत्रुओं के नाश करने वाला बनाता है। ऐसे योग हैं जो भगवान श्री राम को चक्रवर्ती बनाते हैं। ऐसे कई योग भगवान राम की जन्म पत्रिका में उल्लेखित हैं। इस जन्म पत्रिका के संदर्भों की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है। सोलंकी ने बताया कि भगवान श्री राम की जन्म पत्रिका का प्राथमिक प्रमाण विश्व में एकमात्र उज्जैन में ही है। अन्य सभी प्रमाण साहित्यिक हैं। इसी चित्र के नीचे रामनवमी उत्सव का दृश्य भी चित्रित है जिसमें उज्जैन नगरी में राम नवमी का महोत्सव भव्य रूप से मनाया जा रहा है।
300 वर्ष पूर्व के मालव मराठा शैली के हैं चित्र
मराठा काल के 300 वर्ष पूर्व के मालव मराठा शैली के यह प्राकृतिक रंगों के चित्र पत्थर की दीवार पर चूना, गोबर, भूसा और मोम के मिश्रण से बने हैं। गीली अवस्था में ही चित्रों का चित्रण किया जाता था। यह चित्र सदियों बाद भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उज्जैन की पुरातात्विक एवं धार्मिक धरोहर को सहजने के लिए मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग को पहल करना चाहिए। इन चित्रों पर ध्यान देकर इन्हें सहेजने की आवश्यकता है।
(उज्जैन से निलेश नागर की रिपोर्ट)