15 फीट ऊंची, 10 फीट चौड़ी होगी प्रतिमा
महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने बताया कि महाकाल लोक में जल्द ही सप्तऋषियों की प्रतिमाएं लाल पत्थर की नजर आएगी। ये प्रतिमाएं ग्रन्थों और पौराणिक आधार पर अलग-अलग स्वरूपों में दिखाई देगी। इन प्रतिमाओं का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के द्वारा हरिफाटक के हाट बाजार में करवाया जा रहा है। जिसे बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से ओडीशा के कोणार्क से आए कलाकारों के द्वारा बनाया जा रहा है। सप्तऋषि की प्रतिमाएं के स्केच अयोध्या में भगवान श्री राम की प्रतिमा का स्केच बनाने वाले सुनील विश्वकर्मा ने तैयार किए हैं, उसी आधार पर प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। प्रत्येक प्रतिमा 15 फीट ऊंची, 10 फीट चौड़ी होगी। एक प्रतिमा को बनाने के लिए 8 से 10 कलाकार हर दिन काम कर रहे हैं। सभी प्रतिमाएं बनाने में करीब छह महीने का समय लगेगा। इन प्रतिमाओं की एक विशेषता यह भी है कि इन पर की जाने वाली नक्काशी किसी मशीन से नहीं बल्कि, छेनी और हथौड़ी से की जा रही है। अभी ओडिशा से आए कलाकार इन मूर्तियों को तराशने का काम कर रहे हैं, मूर्तियां तैयार होने के बाद कोणार्क से और भी कलाकार आएंगे जो इन प्रतिमाओं को फाइनल टच देंगे।
हजारों सालों तक खराब नहीं होने वाले पत्थर से बन रही मूर्तियां
सप्त ऋषियों की इन प्रतिमाओं को उज्जैन के हरि फाटक ओवरब्रिज के पास स्थित हाट बाजार में तैयार किया जा रहा है। जिन सप्तऋषियों की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं उनमें ऋषि अत्रि, कश्यप, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ, भारद्वाज और विश्वामित्र शामिल हैं। यह मूर्तियां बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थर से बनाई जा रही हैं जो हजारों साल तक खराब नहीं होता और न ही इसकी चमक कम होती है। बारिश के दिनों में ये पत्थर दोगुना चमकता है।
सभी प्रतिमाएं पत्थरों की लगाई जाएंगी
जानकारी के अनुसार अभी सप्तऋषि की प्रतिमाएं बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थर से बनाई जा रही हैं। लेकिन, आने वाले दिनों में महाकाल लोक में लगीं अन्य शिव प्रतिमाओं को भी इसी पत्थर से बनाया जाएगा। इसके लिए एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।
हवा में उड़ गई थीं सप्तऋषि की प्रतिमाएं
बता दें कि 29 मई 2023 को तेज आंधी तूफान के बीच महाकाल लोक में लगी सप्तऋषि की विशालकाय प्रतिमाएं हवा में उड़ गई थीं। प्रतिमाओं के टूटने पर उस समय जमकर बखेड़ा खड़ा हुआ था। इन प्रतिमाओं को लगाने वाली एजेंसी ने इन्हें दोबारा लगाया था। अब कुछ महीने बीतने के बात इन प्रतिमाओं को लाल पत्थर से बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था महाकाल लोक का लोकार्पण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। स्वर्ग से भी सुंदर माने जाने वाले इस लोक की भव्यता शुरुआती दौर में तो काफी अच्छी थी। लेकिन, 1 वर्ष पहले आए आंधी तूफान ने इस लोक में लगाई गई मूर्तियों की क्वालिटी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे, क्योंकि आंधी के दौरान महाकाल लोक में लगाई गई सप्तऋषि की 7 प्रतिमाओं में से 6 प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर तत्काल हटाया गया था और इसकी बजाय फाइबर रिइंफोर्स प्लास्टिक (एफआरपी) की सप्तऋषि की नई प्रतिमाएं महाकाल लोक में लगाई गई थीं।
(उज्जैन से निलेश नागर की रिपोर्ट)