दीपावली का मंगल त्योहार मनाने के लिए पूरे देश में उत्साह है, लेकिन उज्जैन के कुछ घरों में दुख और चिंता पसरी थी कि त्योहार कैसे मनेगा। इन घरों में रहने वालों की आंखों में आंसू और चेहरे पर उदासी थी। चिंता थी कि दीपावली आ गई है, लेकिन घर में राशन तक नहीं। इस दुख और चिंता को समाजसेवी व संगिनी ग्रुप की संस्थापक अध्यक्ष ममता सांगते ने समझा। उन्होंने निर्णय लिया कि इन सभी जरूरतमंदों के आंसू पोंछे जाएंगे और घर में खुशियों की टोकरियां पहुंचाई जाएंगी।
इसके बाद बस्ती-बस्ती जाकर ऐसे जरूरतमंद परिवारों की जानकारी जुटाई गई और कई परिवारों को रविवार की सुबह राशन, पूजा का सामान, नमकीन, मिठाई, साड़ी व पूजा के पटाखों से भरी टोकरी भेंट की गई। इसमें संस्था जिजीविषा की संस्थापक डॉक्टर सतींदर कौर सलूजा ने सहयोग किया। संगिनी ग्रुप अध्यक्ष ममता सांगते ने बताया कि यह सार्थक प्रयास चार वर्ष पहले कोरोना के दौरान शुरू किया था। कोरोना के बाद ऐसे कई परिवार निराश्रित हो गए थे, जिनमें कुछ दिव्यांग भाई, बहन व कई बुजुर्ग हैं। कुछ परिवार तो ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर है। उनमें से सक्षम लोगों को रोजगार और असक्षम लोगों को राशन देने का बीड़ा उठाया गया।
संकल्प लिया कि इनके परिवार में भी दिवाली की खुशियां लाने की एक सार्थक पहल करें ताकि उनके घर में भी खुशियों के दीप जल सकें। इसी बात को ध्यान में रखकर संगिनी समूह ने 60 परिवारों को दिवाली की शगुन की टोकरी भेंट की। इसमें वह सारा सामान रखा गया जो एक संपन्न परिवार की दिवाली मनाने में रखा जाता है।