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MP Election 2023: आप ने तैयार की रुको और देखो की 'रणनीति', भाजपा व कांग्रेस के असंतुष्टों पर भी नजर

Sun, 01 Oct 2023 04:26 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

MP Election 2023: भाजपा ने केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों को टिकट देकर दूसरे दलों को ना सिर्फ चौंकाया है, बल्कि चुनावी परिदृश्य को भी बदल डाला है। कांग्रेस, आप सभी को भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के बाद अपनी रणनीति में कुछ ना कुछ बदलाव करना पड़ा है।
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भाजपा की दूसरी सूची के बाद आप ने बदली रणनीति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अब तक मालवा-निमाड़ की एक भी सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। प्रदेश की  10 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी आप को भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी की गई दूसरी सूची के बाद अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर सा होना पड़ा है। अब पार्टी ने रुको और देखो कि रणनीति अपना ली है। भाजपा द्वारा बड़े चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने के बाद आप को भी ऐसे चेहरों की तलाश है। फिलहाल पार्टी के पास ऐसे चेहरे ज्यादातर सीटों पर नहीं है, इसलिए वो भाजपा और कांग्रेस में जो बड़े असंतुष्ट चेहरे हैं, उन पर भी नजर बनाए हुए है।
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भाजपा अब तक विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की तीन सूची जारी कर चुकी है और जल्दी ही अगले कुछ ही दिनों में पार्टी द्वारा चौथी सूची जारी किए जाने की भी संभावना है। भाजपा ने दूसरी सूची में केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और बड़े नेताओं को टिकट देकर दूसरे दलों को ना सिर्फ चौंकाया है, बल्कि चुनावी परिदृश्य को भी बदल डाला है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित जितने भी दल विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, उन सभी को भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के बाद अपनी रणनीति में कुछ ना कुछ बदलाव करना पड़ा है।



आम आदमी पार्टी की बात करें तो पार्टी चुनावों मैदान में उम्मीदवारों को उतारने से पहले चयन की एक बड़ी प्रक्रिया को अपना रही है। उसने बकायदा आवेदन मांगे थे। लेकिन यह चयन प्रक्रिया भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के पहले की है। बताया जाता है कि भाजपा की दूसरी सूची में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सांसद राकेश सिंह, गणेश सिंह, रीति पाठक सहित अन्य बड़े चेहरों को मैदान में उतारने के बाद आम आदमी पार्टी के पास इनका मुकाबला करने के लिए बड़े चेहरों का संकट दिखाई देने लगा है। सूत्रों का कहना है कि आम आदमी पार्टी जातीय समीकरण और भाजपा-कांग्रेस के भीतर के असंतोष को देखकर आगे की रणनीति तय कर रही है। ऐसे में हो सकता है कि चयन प्रक्रिया में जो नाम आए हैं या जिन विधानसभा सीटों पर पैनल बनी है, वहां इस पैनल को दरकिनार कर दूसरी पार्टियों से आए बड़े चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
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