उज्जैन में भगवान महाकाल की कार्तिक मास में पहली सवारी सोमवार को धूमधाम से निकली। राजाधिराज महाकालेश्वर रजत पालकी में सवार हुए। शिप्रा के रामघाट पहुंचे और मंदिर लौटे। भगवान मनमहेश रूप में अभिषेक पूजन किया गया। अब छह नवंबर को हरि-हर मिलन सवारी निकाली जाएगी।
इस बार कार्तिक-अगहन मास में भगवान महाकाल की पांच सवारियां निकलने वाली हैं। सभा मंडप में पूजन के बाद शाही ठाठ-बाट से राजाधिराज की सवारी शिप्रा तट पहुंची। इस दौरान सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी से होकर गुजरी। इस दौरान लोगों में भी खूब उत्साह दिखाई दिया। पुजारी ने शिप्रा जल से भगवान महाकाल के मनमहेश रूप का अभिषेक पूजन किया। इसके बाद राणौजी की छत्री घाट के रास्ते गणगौर दरवाजा होते हुए पालकी ने नगर प्रवेश किया। मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा होते हुए सवारी मंदिर पहुंची।
इस बार पांच सवारी
कार्तिक-अगहन मास में भी राजाधिराज महाकालेश्वर अपनी प्रजा का हालचाल लेने मंदिर से बाहर निकलकर नगर भ्रमण करते हैं। कार्तिक मास की पहली सवारी सोमवार को निकाली गई। अब छह नवंबर को रात 11 बजे हरि-हर मिलन की सवारी निकाली जाएगी। फिर 7 नवंबर को कार्तिक मास की दूसरी सवारी निकलेगी। 14 नवंबर को अगहन मास की पहली और 21 नवंबर को आखिरी सवारी निकलेगी।
जयपुर से आई महिला को पुजारी ने कंबल डालकर बचाया
श्री महाकाल मंदिर में सोमवार सुबह जयपुर की एक भक्त की साड़ी में आग लग गई। वह चीखते हुए बाहर भागी। पुजारियों, अन्य भक्तों और कर्मचारियों ने आग बुझाई और महिला को अस्पताल पहुंचाया। आग से महिला का पैर झुलस गया है। जयपुर की शोभा कुंवर पति हनुमान सिंह परिवार के छह सदस्यों के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने आई थी।
मंदिर परिसर में त्रिविष्टेश्वर मंदिर में छोटे शिवलिंग के पास दीपक जल रहा था। जब वह दर्शनों के लिए झुकी, तब साड़ी दीपक के ऊपर गिर गई। आग देखकर वह घबराकर यहां-वहां दौड़ने लगीं। पुजारी दिलीप गुरू ने भद्रकाली मंदिर से कंबल उठाया और महिला के ऊपर डाला। डॉक्टरों का कहना है कि महिला सुरक्षित है। पैर जरूर झुलस गया है।