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Ujjain News: सीएम मोहन यादव ने सपत्नीक मां शिप्रा का पूजन किया, रामघाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब

Tue, 26 May 2026 08:28 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

नौसेना के बैंड ने समुद्र की लहरों सा अनुशासन, सुरों में राष्ट्रभक्ति का जोश की प्रस्तुति दी, जिसने समां बांध दिया। इस अवसर पर भजन गायिका मैथिली ठाकुर ने भी प्रस्तुति दी।
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ऐसे हुआ यात्रा का समापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा का समापन मंगलवार को रामघाट पर श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। इस मौके पर भारतीय नौसेना के बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक मां शिप्रा का पूजन कर 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम सभी का सौभाग्य है कि इस बार गंगा दशहरा पर्व बेहद भव्य और अद्भुत रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने मां शिप्रा से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और उज्जैन की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

रामघाट पर भारतीय नौसेना के बैंड ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। सुरों में राष्ट्रभक्ति और अनुशासन की झलक साफ दिखाई दी। वहीं भजन गायिका मैथिली ठाकुर ने भी भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां शिप्रा में दीप प्रवाहित कर आस्था व्यक्त की। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

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मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा सोमवार से शुरू हुई थी। दो दिनों तक चली इस यात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने जगह-जगह मंच लगाकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यात्रियों के लिए ठंडा पानी, शरबत, फल और स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई।

यात्रा के पहले दिन रामघाट से शुरू होकर नृसिंह घाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम होते हुए दत्त अखाड़ा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। दूसरे दिन यात्रा दत्त अखाड़ा से शुरू होकर रणजीत हनुमान, कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका, भर्तृहरि गुफा और वाल्मीकि धाम होते हुए पुनः रामघाट पहुंची। यह यात्रा शिप्रा लोक संस्कृति समिति के संयोजन में महाराज विक्रमादित्य रिसर्च इंस्टीट्यूट, उज्जैन विकास प्राधिकरण और रामघाट तीर्थ पुरोहितों के सहयोग से आयोजित की गई।

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