उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान श्री महाकालेश्वर की मार्गशीर्ष माह की पहली व कार्तिक मार्गशीर्ष (अगहन) माह की तीसरी सवारी सोमवार 18 नवंबर को शाम चार बजे निकली। श्री महाकालेश्वर के दर्शन कर भक्त आनंदित व स्वयं को भाग्यशाली मान रहे थे।
सवारी के दौरान अवंतिकापुरी शिवमय हो गई। सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित सभामंडप में मुख्य पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री चन्द्रमौलेश्वर स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। पूजन-अर्चन के दौरान मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ आदि उपस्थित रहे।
पूजन उपरांत भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर प्रजा का हॉल जानने नगर भ्रमण पर निकले। सवारी में आगे तोपची, कडाबीन, पुलिस बैण्ड, घुडसवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान नगर वासियों को बाबा के आगमन की सूचना देते चल रहे थे। पालकी को मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान को सलामी (गॉड ऑफ ऑनर) दी गई।
सवारी श्री महाकालेश्वर मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर मां क्षिप्रा के जल से भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर के अभिषेक तत्पश्चात आरती की गई। आरती उपरांत सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर पहुंची।
गोपाल मंदिर पर पालकी में विराजमान श्री चंद्रमोलेश्वर भगवान के परम्परागत पूजन उपरांत सवारी पटनी बाजार, गुदरी बाजार होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। जहां श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में पुनः पूजन-आरती उपरांत सवारी का विश्राम हुआ। मार्गशीर्ष माह (अगहन) की दूसरी व अंतिम सवारी राजसी (शाही) सवारी के रूप में 25 नवम्बर 2024 को निकाली जाएगी।