उज्जैन के नयापुरा में रहने वाले प्रतीक ने पुलिस से शिकायत की थी कि उसके साथ ठगी की गई है। इसके लिए ठगों ने प्रतीक को मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर होना बताया और मोबाइल सस्ते में बेचने की बात की। जब डील हो गई तो दो लाख रुपए की मांग की गई। इसके लिए क्यूआर कोड भेजा गया। इस कोड पर प्रतीक ने भुगतान भी कर दिया।
29 अक्टूबर को जीवाजीगंज थाना पुलिस को नयापुरा में रहने वाले प्रतीक ने एक शिकायत की। उसने बताया कि 21 अक्टूबर को उसके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल पर बताया गया कि फोन करने वाला भोपाल से बोल रहा है और वो मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर है। फोन करने वाले ने अपने को जैन समाज का बताया। जैन समाज की बात होने के कारण प्रतीक कॉलर की बातों में आ गया। और उसे दुकान के बारे में जानकारी दी। कॉलर की बातें सुनकर विश्वास होने पर प्रतीक ने उसे 8 मोबाइल का आर्डर दे दिया। कॉल करने वाले ने मोबाइल पर ही क्यूआर कोड भेजा और 2 लाख रुपए भेजने की बात कही। इसके साथ ही 2 दिन में मोबाइल की डिलेवरी का वादा भी किया। इसके बाद क्यूआर कोड स्कैन करके प्रतीक ने रुपयों का भुगतान कर दिया। जब दो दिन बाद मोबाइल डिलेवर नहीं हुए तो उसी नम्बर पर प्रतीक ने कॉल किया, लेकिन मोबाइल स्विच-ऑफ आया। संबंधित व्यक्ति के नंबर पर लगातार कॉल की गई लेकिन संपर्क नहीं हुआ।
फिर इस पूरे मामले की शिकायत प्रतीक ने पुलिस को की। इस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया। जांच अधिकारी डीएस रावत ने बताया कि एक माह बाद जबलपुर के साउथ एवेन्यू माल रोड पर रहने वाले विनय, पिता नारायणदास भवानी और भोपाल के रहने वाले नितेश, पिता रघुवीर साहू निवासी को हिरासत में लिया गया। दोनों से पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया है। इनसे पूछताछ करके 4 दिनों का रिमांड लिया गया है। गिरफ्तार किए गए नितेश के खातों का उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम जमा कराने में होता था। उसने अपना खाता 60 हजार में बेच दिया था। पुलिस की जांच में नितेश के खाते पुणे और मुम्बई में होना पाए गए। पुलिस का कहना है कि छानबीन में कई और धोखाधड़ी के मामलों का पता चल सकता है।