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उज्जैन: सांसद ने लोकसभा में उठाया मुद्दा-शिप्रा नदी में कान्ह नदी का पानी न मिले इसके लिए की जाए ठोस पहल

Sat, 04 Dec 2021 04:37 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

शिप्रा नदी में मिल रहे कान्ही नदी के गंदे पानी का मामला लोकसभा में उठा है। उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने मुद्दा उठाते हुए सदन से मांग की है कि शिप्रा नदी को दूषित होने से बचाएं और पवित्रता की रक्षा करें।
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मिट्टी से बनाया गया अस्थायी बांध शुक्रवार रात को टूट गया था। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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शिप्रा नदी में मिल रहे कान्ही नदी के गंदे पानी का मामला लोकसभा में उठा है। उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने मुद्दा उठाते हुए सदन से मांग की है कि शिप्रा नदी को दूषित होने से बचाएं और पवित्रता की रक्षा करें। सांसद ने कहा है कि शिप्रा नदी में मिल रहे कान्ह नदी के गंदे पानी और सीवरेज का पानी रोकने के इंतजाम किए जाएं।
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लोकसभा के शून्य काल में सांसद अनिल फिरोजिया ने यह प्रश्न उठाया। कहा कि शिप्रा नदी में कान्ह नदी का पानी न मिले इसके लिए ठोस पहल की जाना चाहिए। जितना महत्व मां गंगा नदी का है उतना ही धार्मिक महत्व मां शिप्रा का भी है। कान्ह नदी के दूषित पानी के शिप्रा नदी में मिलने के कारण उज्जैन के रामघाट तक शिप्रा नदी प्रदूषित हो रही है। पानी से बदबू आने लगती है। इससे यह पानी नहाने लायक भी नहीं रहता। कान्ह नदी के संरक्षण के लिए कोई स्थायी योजना बनाई जाना चाहिए। जिससे लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिले और वह शिप्रा के जल का आचमन कर सके। नदी ने गंदे नाले का रूप धारण कर लिया है। इंदौर व आसपास के तमाम उद्योगों के दूषित पानी व सीवरेज का पानी उज्जैन में त्रिवेणी के तट पर  शिप्रा नदी में मिलता है।

मिट्टी से बनाते हैं अस्थायी पाला
सांसद ने कहा कि पर्वों पर स्नान के लिए उज्जैन में हजारों श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान कान्ह नदी के गंदे पानी से बचाने के लिए प्रशासन अस्थायी तौर पर लाखों रुपये की लागत से मिट्टी का पाला बनाता है। लेकिन हर बार बहुत ही कम समय में ये पाला टूट जाता है। इससे सरकार का लाखों रुपया खर्च भी होता है, लेकिन स्थायी हाल नहीं निकल पाता है। कान्ह नदी के जल का उपचार करने के लिए स्थायी और ठोस परियोजना बनाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए त्रिवेणी के समीप पीएचई ने मिट्टी का बांध बनाया है। मिट्टी के बांध में प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भर कर बहाव को रोका गया है। इस पर मिट्टी का भराव किया जा रहा है। हालांकि शुक्रवार रात को ही मिट्टी से बना यह अस्थायी बांध टूट गया। पानी के तेज बहाव के कारण ऐसा हुआ।
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