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Indore Metropolitan Area: पांच बार बदला गया इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी का प्रस्ताव, 140 KM दूर के शहर भी जोड़ दिए

Sun, 28 Jun 2026 03:46 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के विस्तारित प्रस्ताव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छह जिलों को एक साथ शामिल किए जाने, इंदौर की बजाय उज्जैन को प्राथमिकता देने और 16 हजार वर्ग किलोमीटर तक दायरा बढ़ाने पर विशेषज्ञों और शहरवासियों ने आपत्ति जताई है।
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उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के विस्तारित प्रस्ताव का मामला चर्चा में। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रस्ताव में पांच बार बदलाव किया गया और हर बार इसका दायरा बढ़ाया गया। पहले इसका दायरा साढ़े छह हजार वर्ग किलोमीटर था। अंतिम प्रस्ताव 16 हजार वर्ग किलोमीटर का था, जिसे मंजूरी दे दी गई। एक साथ छह जिलों को जोड़े जाने को भी मास्टर प्लान से जुड़े विशेषज्ञ उचित नहीं मान रहे हैं।
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इंदौर से रतलाम की दूरी 140 किलोमीटर है, फिर भी उसे उज्जैन-इंदौर महानगर क्षेत्र में शामिल किया गया है। यदि महानगर प्राधिकरण के कार्यालय में रतलाम के लोगों को आना होगा, तो उन्हें लगभग दो घंटे का सफर तय करना पड़ेगा।

 

इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला
क्यों हाशिए पर जा रहा इंदौर?
इंदौर को महानगर बनाने की कवायद हो रही है, लंबे समय से इसकी दरकार भी थी। लेकिन अब यह प्रक्रिया सवालों के घेरे में है, क्योंकि इंदौर के अलावा पांच अन्य जिलों को महानगर में जोड़ दिया गया है। नाम में भी उज्जैन को प्राथमिकता देकर इंदौर को हाशिए पर रखकर पीछे धकेल दिया गया। मेट्रो ट्रेन का संचालन लोकार्पण की देरी से टल गया, मास्टर प्लान अभी तक नहीं आ पाया है। इस तरह के तमाम मुद्दों पर शहरवासी खुद को अब ठगा महसूस करने लगे हैं। कहीं न कहीं इन सबके पीछे मेट्रोपॉलिटन प्रस्ताव को देखा जा रहा है।

इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला
पहले चार जिले शामिल थे
जब मेट्रोपॉलिटन एरिया का पहला प्रस्ताव तैयार हुआ था, तब उसमें इंदौर, उज्जैन, धार और देवास जिले शामिल थे। उस समय इसका दायरा 6,613 वर्ग किलोमीटर था। बाद में इसमें बदनावर और बड़नगर को भी शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संशोधित प्रस्ताव में शाजापुर और मक्सी को भी जोड़ दिया, जिससे इसका क्षेत्रफल बढ़कर 16 हजार वर्ग किलोमीटर हो गया।

यह आएगी परेशानी
मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 16 हजार वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने का फैसला बहुत अधिक फायदेमंद नहीं रहेगा, क्योंकि किसी क्षेत्र का विकास और बसाहट अपने हिसाब से समय लेते हैं। इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा और तेजी से विकसित होने वाला शहर है, लेकिन पिछले 20 वर्षों में बसाहट मुख्य रूप से बायपास क्षेत्र की ओर ही बढ़ी है। सुपर कॉरिडोर पर आज भी अपेक्षित स्तर पर बसाहट शुरू नहीं हो पाई है। इस हिसाब से मेट्रोपॉलिटन एरिया के अन्य हिस्सों को विकसित होने में काफी समय लगेगा। हालांकि, क्षेत्र

पूर्व सिटी प्लानर सी भालेराव। - फोटो : अमर उजाला
प्रशासनिक जटिलताएं भी बढ़ेंगी
पूर्व सिटी प्लानर सी भालेराव का कहना है कि महानगर का आकार बड़ा होने से प्रशासनिक जटिलताएं भी बढ़ेंगी, लेकिन भविष्य के हिसाब से आवश्यक है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखना आसान नहीं होगा।

गोपाल बलवानी - फोटो : अमर उजाला
फायदा तो मिलेगा
उज्जैन के उद्योगपति गोपाल बलवानी का कहना है कि इंदौर औद्योगिक नगर है और उज्जैन धर्म पर्यटन की नगरी। महानगर बनने का फायदा इंदौर के आसपास के शहरों को भी मिलेगा।
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शंकर लालवानी, सांसद - फोटो : अमर उजाला
कार्यालय इंदौर में रखने की कवायद
मेट्रोपॉलिटन एरिया के नाम में इंदौर को प्राथमिकता देने के बजाय उज्जैन का नाम पहले रखा गया। अब यह भी चर्चा है कि इसका कार्यालय उज्जैन में स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि महानगर प्राधिकरण का कार्यालय इंदौर में ही रहना चाहिए। इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी है और कार्यालय दूर होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

क्या है मेट्रोपॉलिटन योजना?
मेट्रोपॉलिटन शहर (महानगर) ऐसा घना शहरी क्षेत्र होता है जिसकी जनसंख्या सामान्यतः 10 लाख (या उससे अधिक) होती है। इसमें एक मुख्य शहर और उसके आसपास के इलाके शामिल होते हैं, जो आपस में परिवहन नेटवर्क, उद्योग और बुनियादी ढांचा साझा करते हैं। मेट्रोपोलिटन योजना एक विशेष शहरी विकास योजना है जिसका उद्देश्य ऐसे विशाल और घने क्षेत्रों का सुव्यवस्थित विकास करना है।

मेट्रोपॉलिटन एरिया फैक्ट फाइल
  1. इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रस्तावित क्षेत्र में इंदौर जिले की 100 प्रतिशत आबादी शामिल है, जबकि उज्जैन जिले की 59 प्रतिशत आबादी ही इसके दायरे में आती है।
  2. उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के नोटिफिकेशन के अनुसार इंदौर के 654 गांव, देवास के 593, उज्जैन के 624, धार के 224, शाजापुर के 546 और रतलाम के 140 गांव इस क्षेत्र में शामिल किए गए हैं।
  3. मेट्रोपॉलिटन एरिया में इंदौर-उज्जैन सहित छह जिलों की 75.34 लाख आबादी शामिल होगी।
  4.  इंदौर और आसपास के छह जिलों का कुल क्षेत्रफल 33 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन एरिया में कुल 16,000.87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ही शामिल किया गया है।
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