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मप्र में नहर के जरिए हो रही लकड़ी की तस्करी

Tue, 04 Dec 2012 05:46 PM IST
भोपाल/इंटरनेट डेस्क
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राजधानी रांची से सटे जंगलों से बेशकीमती लकड़ी की तस्करी नहर के जरिए की जा रही है। एक हिंदी दैनिक के अनुसार तस्कर जंगल की लकड़ी को बल्ली का आकार देकर केरवा बांध से जुड़ी नहर में बहा देते हैं। फिर दो से तीन किमी. दूर खड़े किए गए लड़के इन लकड़ियों को नहर से निकाल लेते हैं। अनोखे तरीके से हो रही यह तस्करी दिन भर चलती रहती है।
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लंबे से चल रही इस तस्करी की वन विभाग को भनक तक नहीं है। यहां जंगलों में बड़ी तादाद में सागौन और शीशम के दरख्त लगे हुए हैं। केरवा बांध से निकलने वाली एक नहर इसी जंगल से होकर गुजरती है। जो बैरागढ़ चीचली के पास 11 मील तिराहे से होते हुए आगे ग्रामीण इलाकों की तरफ निकल जाती है। 11 मील तिराहे के पास नहर जंगल से बाहर मैदानी इलाके में आ जाती है, जो पूरी तरह सुनसान इलाका है। जंगल से 11 मील तिराहे की दूरी करीब तीन किमी. के आसपास है। बहाई हुई लकड़ी बहकर 11 मील इलाके में पहुंचती है, जहां तैनात कम उम्र के लड़के इस बल्ली को उठाकर ले जाते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों से बचने के लिए तस्कर लकड़ी पर तीन अलग-अलग रंगों (काला, लाल और पीला) से निशान लगाते हैं। अलग-अलग बनाए गए तीन प्वाइंट्स पर लड़कों को खास रंग के निशान वाली लकड़ी निकालनी होती है। इससे एक जगह ढेर न लगकर हर जगह थोड़ी-थोड़ी लकड़ियां इकट्ठी होती हैं। साथ ही लकड़ियां आधे घंटे के अंतराल पर बहाई जाती हैं। जिसे शक से बचा जा सके और लकड़ी उठाने वाला समय पर लकड़ी पहुंचा भी सके। अगर कहीं लड़का पकड़ा भी जाता है तो तस्करों को इससे समय रहते खबर लग जाती है।
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