उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू (फाइल फोटो)
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मध्यप्रदेश के इंदौर में एक निजी विश्वविद्यालय वैष्णव विद्यापीठ के द्वितीय दीक्षांत समारोह के अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने संसद भवन पर आतंकी हमले के मामले में मृत्युदंड पाने वाले अफजल गुरु का समर्थन कर रहे लोगों से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इन व्यक्तियों की ऐसी लोकतंत्र विरोधी सोच शर्मनाक और मूर्खतापूर्ण है।
उप राष्ट्रपति ने आगे कहा कि देश के 920 विश्वविद्यालयों में से कुछेक विश्वविद्यालय ही गलत कारणों के चलते खबरों में आते हैं। और यहां कुछ विवाद सामने आते हैं। कुछ लोगों द्वारा कहा जाता है कि अफजल गुरु का अधूरा काम वे पूरा करेंगे। उन्होंने किसी विश्वविद्यालय का नाम लिए बगैर आगे कहा, ऐसी सोच रखने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए। अफजल गुरु ने भारतीय संसद को बम धमाके से उड़ाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा था।
नायडू ने कहा, जब 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर आतंकी हमला हुआ, तो मैं भी वहीं था। लेकिन हम लोग बच गए। फिर भी कुछ लोग कह रहे हैं कि वे अफजल गुरु का अधूरा काम पूरा करेंगे। यानी इन लोगों के इरादे संसद भवन को बम से उड़ाकर भारत में लोकतंत्र को समाप्त करने के हैं। यह कितनी बेवकूफी भरी सोच है।
उप राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के कदम के बारे में कई लोगों के अज्ञान पर चिंता भी जताई। उन्होंने इतिहास को याद रखे जाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, मैं देश के उप राष्ट्रपति के रूप में आज एक बात कहना चाहता हूं कि कई बच्चे नहीं जानते कि हाल ही में अनुच्छेद 370 के संदर्भ में संसद में कितनी विस्तृत चर्चा हुई।
नायडू ने कहा, जब मैंने यह बात अपनी पत्नी से कही, तो उसने मुझे जवाब दिया कि मैं केवल बच्चों की बात क्यों कर रहा हूं। अनुच्छेद 370 के विषय की पृष्ठभूमि और इसके अलग-अलग पहलुओं के बारे में कई पुरुषों और महिलाओं को भी पर्याप्त ज्ञान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, भारत हमारा देश है। अगर कश्मीर में कुछ चल रहा है, तो हम उससे चिंतित हैं। कन्याकुमारी में कुछ चल रहा है, तो हम सबको इससे चिंतित होना चाहिए। देश की एकता और अखंडता हमारे लिए सर्वोपरि है।