हर साल की तरह महोत्सव के दौरान भगवान वैकुंठनाथ, महालक्ष्मी जी, गोदांबाजी, रघुनाथजी और रंगनाथ भगवन का रत्नों से जड़े गहनों से श्रृंगार कर हिंडौले को मंदिर के शीश महल में सजाया जाएगा
सावन का महीना शुरू होते ही बाग-बगीचों और घरों में झूले टंग जाते हैं। बिना झूला झूले सावन का मजा अधूरा सा रह जाता है। सावन और झूला का रिश्ता बहुत पुराना है। हरियाली तीज और कई त्योहार बिना झूले अधूरे माने जाते हैं। इसी को देखते हुए हरियाली तीज का पर्व देश भर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यही नहीं सहेलियों के साथ झूला झूलना न केवल हंसी का हिस्सा है, बल्कि यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है, तो वही इस पर्व पर मंदिरों को फूलों से बहुत सुन्दर सजाया जाता है। इसी बीच मंदिरों की नगरी पुष्कर स्थित श्री राम वैकुंठ दिव्यदेश नए रंगजी मंदिर और पुराने रंगजी मंदिर में रविवार से सावन के झूले शुरू हुए।
विज्ञापन
नए रंगजी मंदिर में आयोजित 15 दिवसीय झूला महोत्सव के पहले दिन शीश महल के कपाट खोले गए और उनके सामने भगवान वेंकटेश और गोदम्बा जी को रत्नों और आभूषणों से श्रृंगार कर महल में एक सुंदर हिंडौला सजाया गया। झूला मंडप में एक तरफ राधा-कृष्ण रास की झांकी सजाई गई। तो वही दूसरी ओर पुष्कर तीर्थ की बसावट को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा भजन मंडली ने सावन के झूलों पर आधारित भजन प्रस्तुत कर दर्शनार्थियों को का मन मोहित कर दिया। पहले दिन ही देर रात तक भगवान को झूला देने व दर्शन के लिए मंदिर में भक्तों का तांता लगा रह। मंदिर प्रशासक सत्यनारायण रामावत ने बताया कि हर साल की तरह शाम 7 से 10 बजे तक आयोजित झूला महोत्सव के दौरान भगवान वैकुंठनाथ, महालक्ष्मी जी, गोदांबाजी, रघुनाथजी और रंगनाथ भगवन का रत्नों से जड़े गहनों से श्रृंगार कर हिंडौले को मंदिर के शीश महल में सजाया जाएगा।
इसके अलावा झूला मंडप में बिजली से चलने वाले यंत्रों से रामलीला, गो-दोहन लीला, माखन लीला, यमलार्जुन मोक्ष लीला, नरसिंह लीला, शिव-तांडव नृत्य लीला आदि का प्रदर्शन किया जाएगा। पुष्कर के साथ-साथ अयोध्या, चित्रकूट, मथुरा, वृंदावन, बद्रीनारायण आदि धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। वही हिरण्यकश्यप वध, रावण वध, पूतना वध, कंस वध, भस्मासुर वध, सेतु बंधन आदि की आकर्षक झांकी सजाई गई।