आर्थिक आधार पर सभी वर्गों को आरक्षण के मुद्दे को लेकर देश की सभी राज्य सरकारों से रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए राजपूत समुदाय के एक संगठन ने रविवार को इंदौर में कहा कि आरक्षण की मौजूदा जातिवादी व्यवस्था को भंग कर दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने संवाददाताओं से कहा, हम चाहते हैं कि आरक्षण की मौजूदा जातिवादी व्यवस्था भंग कर दी जाए। इसकी जगह आर्थिक आधार पर सभी वर्गों को शिक्षा व रोजगार में सरकारी आरक्षण दिया जाए।
गोगामेड़ी आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर इंदौर में 15 सितंबर को निकाली जाने वाली रैली की तैयारियों के सिलसिले में यहां आए थे। उन्होंने कहा, मध्यप्रदेश शासन समेत देश की सभी राज्य सरकारें अपना रुख स्पष्ट करें कि वे आर्थिक आधार पर सभी वर्गों को आरक्षण देना चाहती हैं या नहीं?
वरिष्ठ राजपूत नेता ने यह आरोप भी लगाया कि सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण की पात्रता की जटिल शर्तों के कारण केंद्र सरकार की इस व्यवस्था का लाभ कई जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की, तमाम शर्तें हटाते हुए देश में सभी वर्गों के उन लोगों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए, जिनके परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम हो।
गोगामेड़ी ने दावा किया कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था के अधिकांश लाभ खासकर राजनेताओं, रसूखदार लोगों और आला अधिकारियों के परिवारों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा, आज थावरचंद गहलोत (केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री) हैं। उनको आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
जबकि किसी आम गरीब के पास जाकर देखा जाए तो पता चलेगा कि उसके पास बुनियादी शिक्षा तक नहीं है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी आरक्षण को लेकर पिछले दिनों बयान दिया था। दबी जुबान से सब लोग चाहते हैं कि आरक्षण की मौजूदा जातिवादी पद्धति की समीक्षा हो।