सीधी सिंगरौली सांसद डॉ. राजेश मिश्रा
जिले की देवसर विधानसभा में विकास कार्यों की शुरुआत के साथ ही एक नया सियासी और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। बैढ़न–बरगवां मार्ग से फुलवारी तक बनने वाली 4.40 किलोमीटर सड़क के भूमि पूजन के दौरान सामने आई तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
मामला क्या है?
जानकारी के अनुसार सड़क शिलान्यास के मौके पर सीधी लोकसभा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम, भाजपा जिलाध्यक्ष सुंदरलाल शाह सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान सांसद डॉ. राजेश मिश्रा भूमिपूजन के बाद गैंती से मिट्टी खोदते नजर आए। विवाद की जड़ बनी वह तस्वीर जिसमें सांसद और अन्य नेता पैरों में जूते पहने हुए ही यह कार्य करते दिखाई दिए।
कांग्रेस का तीखा प्रहार
तस्वीरें सामने आते ही कांग्रेस पार्षद अनिल वैश्य ने भाजपा पर सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए विधि-विधान से जूते-चप्पल उतारकर अनुष्ठान की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- हमने हमेशा से धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया है। भाजपा खुद को धर्म का रक्षक बताती तो है, लेकिन असलियत में उनकी आस्था सिर्फ दिखावे तक सीमित है।
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परंपरा क्या कहती है?
सनातन परंपरा में धरती को 'मां' का दर्जा दिया गया है और किसी भी निर्माण से पूर्व भूमिपूजन का अर्थ धरती माता से अनुमति और उनका आशीर्वाद लेना होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार किसी भी पूजन, हवन या भूमि को नमन करने के दौरान जूते-चप्पल उतारना अनिवार्य माना जाता है ताकि पवित्रता बनी रहे।
वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक आयोजनों में कई बार जनप्रतिनिधि औपचारिकता पूरी करते हुए जूते पहने ही सांकेतिक खुदाई कर देते हैं, जिस पर अक्सर जनता और विपक्षी दलों द्वारा सवाल उठाए जाते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास कार्यों का शिलान्यास स्वागत योग्य है लेकिन क्या सार्वजनिक जीवन में धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं की मर्यादा का ध्यान रखना नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है?