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सीधी: कलेक्ट्रेट में लोकायुक्त का ट्रैप, 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते कर्मचारी गिरफ्तार; पहले लिए थे 10 हजार

Fri, 23 Oct 2026 11:34 AM IST
सीधी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीधी

सार

सीधी कलेक्ट्रेट स्थित जनजाति कार्य विभाग के कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस ने संजय सिंह को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। दोबारा नौकरी पर रखने और पुराने वेतन के भुगतान के लिए 50 हजार रुपये मांगने का आरोप है। अधीक्षिका की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

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तीन साल से काम नहीं कर रहे रसोइये से मांगी रिश्वत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीधी जिले के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जनजाति कार्य विभाग के कार्यालय में गुरुवार शाम लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त की 15 सदस्यीय टीम ने शिकायतकर्ता अशोक योगी की शिकायत पर यह कार्रवाई की। पकड़े गए कर्मचारी की पहचान संजय सिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि शिकायतकर्ता को दोबारा नौकरी पर रखने और पुराने वेतन का भुगतान कराने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई थी।

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लोकायुक्त निरीक्षक नरेश बेहरा के अनुसार, अशोक योगी ने शिकायत में बताया था कि उनसे कुल 50 हजार रुपये मांगे गए थे। इनमें से 10 हजार रुपये पहले दिए जा चुके थे, जबकि शेष 40 हजार रुपये देना बाकी था। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी को पकड़ने के लिए कार्रवाई की योजना बनाई।

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रुपये देते ही पहुंची लोकायुक्त की टीम

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गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे अशोक योगी जनजाति कार्य विभाग के कार्यालय पहुंचे और संजय सिंह को 40 हजार रुपये दिए। इसी दौरान पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए संजय सिंह को रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी को सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई।

तीन साल से काम नहीं कर रहे थे शिकायतकर्ता
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अशोक योगी पहले रसोइया के पद पर कार्यरत थे, लेकिन पिछले करीब तीन वर्षों से काम नहीं कर रहे थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें दोबारा नौकरी पर रखने और पुराने वेतन का भुगतान कराने के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए थे। इसी संबंध में उन्होंने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की थी।

अधीक्षिका की भूमिका भी जांच के दायरे में

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लोकायुक्त निरीक्षक नरेश बेहरा ने बताया कि मामले में सुनीता पांडे की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्हें अधीक्षिका बताया गया है। शिकायत के अनुसार, नौकरी पर दोबारा रखने और पुराने वेतन का भुगतान कराने के नाम पर रुपये मांगने में उनकी भूमिका होने का भी आरोप है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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