सतना जिले में कथावाचन करते हुए हिंदू धर्मगुरु श्रीरामभद्राचार्य महाराज ने घोषणा करते हुए कहा, 22 अप्रैल को वैशाख शुक्ल द्वितीय को रामचरित मंदिर का शिलान्यास होगा। इसमें रामचरित मानस की लिखाई और मूर्ति के टंकन का सारा खर्च तुलसीपीठ वहन करेगा। मुझे बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि जब भगवान राम बनवास को चले थे तो खजुरीताल में एक रात रुके थे। यहां पीपल के काफी वृक्ष थे, भगवान राम अब बड़े हो गए हैं और शिक्षा लेने गए हैं।
आगे गुरुजी ने कहा कि भगवान राम माता के कहने पर वन नहीं गए थे, बल्कि देवताओं की स्त्रियों ने कहा कि हम कब तक रावण की बंदीगार में मरती रहेंगी। तब भगवान वन गए, यदि धर्म से राजनीति अलग कर दोगे तो राजनीति विधवा हो जाएगी। रामचंद्र जी धर्म की नीति है, भारत होगा तब न भगवन होंगे, भारत भगवान का मंदिर है। वहीं, गुरुजी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भगवान की पूजा कमल से ही होती है। इसलिए कमल खिलना आवश्यक है।
श्रीराम कथा के दौरान मंच पर ब्रह्मर्षि डॉ. रामविलास बेदांती जी महाराज, शताब्दी महोत्सव के आयोजक श्रीमानसपीठ खजुरीताल के पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री रामललाचार्य जी महाराज, महंत राजीव लोचन शरण जी महाराज मैहर, महंत अयोध्या दास जी महाराज अयोध्या धाम, डॉ. राम अवतार शर्मा राम पथ गमन के अध्यक्ष, जगद्गुरु बिंदु बाध्यचार्य जी महराज अयोध्या, पद्मविभूषण श्रीरामभद्राचार्य जी महराज के शिष्य आचार्य हिमांशु जी और पंडित शशिकांत त्रिपाठी प्रमुख रूप से विराजमान रहे।
मंगलवार को पंचम दिवस की कथा के यजमान सपत्नीक जेपी शर्मा रीवा रहे। श्रीराम कथा प्रारंभ होने से पहले राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल, रैगांव विधायक कल्पना वर्मा, युवा समाजसेवी कुंवर कपिध्वज सिंह ताला हाउस, समाजसेवी रामनिवास उर्मलिया मैहर, पत्रकार उपेंद्र द्विवेदी, कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी पंडित सचिन शर्मा सूर्या ने पूजन महाराज जी का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। रात्रि कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में भव्य कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के जाने माने कवियों ने हिस्सा लिया।
कविगणों में डॉ. राजकुमार शर्मा राज रीवा, रामगोपाल शुक्ल रायगढ़, राम भदावार इटवा, गजेंद्र प्रियांशु बाराबंकी, अभय निर्भीक लखनऊ, डॉ. रामनिहोर तिवारी बल्हौड़, रामलखन सिंह महगना, उपेंद्र द्विवेदी सतना, अमित शुक्ला रीवा, डॉ. आरती तिवारी रीवा, सत्येंद्र सेंगर रीवा, उमेश मिश्रा लखन रीवा, कामता माखन रीवा, सिद्धार्थ श्रीवास्तव रीवा और आशीष तिवारी निर्मल शामिल रहे। देर रात तक दर्शक और श्रोता काव्य पाठ में झूमते रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन खजुरीताल महाराज के कृपापात्र मधुसूदन मिश्रा ने किया।