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MP: बोत्सवाना का तीन सदस्यीय दल कूनो व मंदसौर पहुंचा, इन तैयारियों का लिया जायजा; अब कब आएंगे आठ चीते?

Sat, 20 Dec 2025 08:02 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर/ मंदसौर

सार

प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में लाई जाने वाली चीतों की तीसरी खेप को लेकर बोत्सवाना के तीन सदस्यीय दल ने श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क का दौरा किया। साथ यह दल मंदसौर जिले स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य भी पहुंचा।
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बोत्सवाना से आई टीम का किया गया स्वागत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में चीतों की तीसरी खेप बोत्सवाना से लाई जानी है। इसी क्रम में बोत्सवाना का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क व मंदसौर जिले स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य पहुंचा। यहां चल रही तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बोत्सवाना से लाए जाने वाले आठ चीतों के लिए की जा रही व्यवस्थाओं और बनाए गए क्वारंटीन बाड़ों का जायजा लिया। 

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बोत्सवाना के पर्यावरण एवं पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत संचालित डिपार्टमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ एंड नेशनल पार्क्स के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमम्माडी रूबेन, सुरक्षा अधिकारी एड्रियन खोली और बायोलॉजिस्ट फेमेलो गादिमांग बुधवार को श्योपुर पहुंचे। कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत किया गया। इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने फील्ड विजिट कर चीतों के लिए तैयार किए गए बाड़ों, भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

इस दौरान कूनो नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा चीता प्रोजेक्ट को लेकर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें पिछले तीन वर्षों की प्रगति की जानकारी साझा की गई। इस पर बोत्सवाना के अधिकारियों ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह सफलता की ओर अग्रसर है।

बोत्सवाना से समझौते के तहत आठ चीतों को भारत लाया जाना है
इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार थिरुकुराल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं डीएफओ कूनो उपस्थित रहे।  बता दें कि पिछले माह बोत्सवाना के साथ हुए समझौते के तहत आठ चीतों को भारत लाया जाना है। यह खेप संभावित रूप से जनवरी माह में लाई जाएगी। इसी क्रम में बोत्सवाना का यह प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर है।

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प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि बोत्सवाना का दल कूनो नेशनल पार्क पहुंचा था, जहां उन्होंने चीता शिफ्टिंग को लेकर की गई सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद दल गांधीसागर अभयारण्य का भी भ्रमण करेगा।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया
गांधी सागर अभयारण्य के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) संजय रायखरे ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने क्वारंटीन बोमा (बाड़े), कंट्रोल रूम और पशु अस्पताल सहित चीतों के लिए की गई सभी तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। डीएफओ रायखरे के अनुसार, वर्तमान में गांधी सागर अभयारण्य में छह सामान्य क्वारंटीन बोमा और दो उपचार बोमा तैयार किए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने चीतों की सुरक्षा के लिए बनाए गए शेड, जल स्रोत, बाड़े और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तार से जायजा लिया।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बोत्सवाना से कितने चीते भारत लाए जाएंगे और उनका स्थानांतरण कब किया जाएगा।

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इससे पहले अप्रैल 2025 में कूनो नेशनल पार्क से दो नर चीते प्रभाष और पावक को गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया था, जबकि सितंबर 2025 में मादा चीता धीरा को भी यहां लाया गया था। गांधी सागर अभयारण्य को कूनो नेशनल पार्क के बाद देश के दूसरे प्रमुख चीता अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। गौरतलब है कि दुनिया के सबसे तेज़ स्थलीय जीव चीते को भारत में वर्ष 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत भारत में चीतों की प्राकृतिक आबादी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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