मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सबसे मनोरम जल क्रीड़ा युक्त पर्यटन स्थल केंद्रों में शुमार हो चुका शहडोल जिले का सरसी अब किसी पहचान का मोहताज नहीं है। क्या आप जानते हैं कि बाणसागर के अथाह जल के बीच बने प्राकृतिक टापू को खोजने और उसे पर्यटन स्थल का रूप देने में शहडोल निवासी एक शख्स की अहम भूमिका रही है। वे शख्स हैं, नेवी के विंग कमांडर राजेंद्र निगम।
हालांकि, अब राजेंद्र निगम इंडियन नेवी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन उनकी इस खोज ने शहडोल को नई पहचान दी है। पर्यटन विकास निगम मध्यप्रदेश के सलाहकार के रूप में सेवाएं दे रहे पूर्व नेवी कमांडर राजेंद्र निगम मूलत शहडोल शहर के निवासी हैं। पर्यटन विकास निगम के साथ जुड़कर मध्यप्रदेश में वॉटर स्पोर्ट्स और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर चुके राजेंद्र निगम को शहडोल के लिए कुछ करने की इच्छा थी। उन्होंने गहरे जल के बीच में बने सरसी के टापू को खोज निकाला। उसे पर्यटन के रूप में विकसित करने के सपने को पूरा किया, जिसे मध्यप्रदेश शासन और भारत सरकार ने पूरा सहयोग दिया।
खूब किए यात्रा
हिमालय के सबसे ऊंचे स्थल लेह मुरारी में बोटिंग करने का विश्व रिकॉर्ड बना चुके इंडियन नेवी के सेवानिवृत्त कमांडर राजेंद्र निगम पृथ्वी के चारो ओर पालदार नाव से इंडियन नेवी की तरफ से यात्रा भी कर चुके हैं। 27 वर्ष की नेवी में सेवा के बाद मध्यप्रदेश सरकार में वॉटर स्पोर्ट्स सलाहकार के रूप में जुड़े। क्योंकि उनकी जन्म स्थली शहडोल है। इसलिए यहां के लिए कुछ करने का जज्बा लिए उन्होंने वर्ष 2022 में सरसी की खोज की थी।
गूगल में सर्च करने पर उन्हें बाणसागर डैम के अंदर तीन चार टापू मिले। फिर क्या था, उन्होंने मछुआरों की नाव की और स्वयं के खर्चे से करीब दो दिन की यात्रा के बाद सरसी को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। उन्होंने एक प्रोजेक्ट बनाकर पर्यटन विकास निगम की ओर से मध्यप्रदेश शासन को भेजा। उसके बाद भारत सरकार को भेजा, जहां से मंजूरी मिलने के बाद 35 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए और आज दिनांक में सरसी में बेहतरीन पर्यटन स्थल विकसित हो चुका है।
राजेंद्र निगम की अमर उजाला से बातचीत
उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वह मध्यप्रदेश में 16 बोट क्लब बनवा चुके हैं, जिनमें जबलपुर का बरगी और भोपाल सहित बड़े केंद्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जब वह शुरुआती दिनों में यहां पहुंचे थे तो यहां व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं था। बांधवगढ़ के मारकंडे घाट से यहां पहुंचा जा सकता है। सतना और बांधवगढ़ तथा शहडोल के ब्यौहारी क्षेत्र से भी सरसी पर्यटन केंद्र जुड़ सकता है।
कोरोना काल के दौरान उन्होंने सरसी टापू की खोज की थी। उन्होंने बताया कि यहां एक पुरानी शिव मंदिर स्थापित था, जिसे देख उन्हें और अच्छा लगा। बाणसागर के बैक वॉटर में यह टापू तलाश करने के बाद अब यहां आईलैंड तैयार किया गया है। रिसोर्ट का उद्घाटन करने के लिए प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव शनिवार 14 दिसंबर को एक दिवसीय दौरे पर शहडोल पहुंचेंगे और इसका उद्घाटन करेंगे।
शहडोल से सादिक खान की रिपोर्ट...