जेल से रिहाई के बाद खड़े काग्रेसी।
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धनपुरी में मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काला झंडा दिखाने के मामले में कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को जेल भेजा था, जिनमें एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्र भी शामिल था। हालांकि छात्र को मंगलवार सुबह बुढ़ार उप जेल से रिहा कर दिया गया, लेकिन देर से रिहाई होने के कारण वह अपनी कक्षा 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा नहीं दे सका।
पुलिस के अनुसार नाबालिग छात्र को पुलिस ने धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर बुढ़ार उप जेल भेज दिया था। करीब तीन दिन बाद मंगलवार सुबह लगभग 7 बजे उसकी रिहाई हुई, लेकिन तब तक परीक्षा केंद्र पहुंचने का समय निकल चुका था। परिजनों का आरोप है कि सोमवार को उन्होंने तहसीलदार के समक्ष कई बार गुहार लगाई थी कि छात्र की मंगलवार को बोर्ड परीक्षा है। इसके बावजूद जमानत नहीं दी गई। इतना ही नहीं, मंगलवार सुबह छात्र को बिना परिजनों को सूचना दिए जेल से छोड़ा गया, जिससे वह समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सका।
बुधवार को रिहा हुए दो
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने कुल 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की थी। इनमें से 37 को जमानत दे दी गई थी, जबकि आशू चौधरी, शेख साजिद और एक नाबालिग को जेल भेजा गया था। बुधवार सुबह शेख साजिद उर्फ सन्नी और आशू चौधरी की भी बुढ़ार उप जेल से रिहाई हो गई। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष आज़ाद बहादुर सिंह, प्रदीप सिंह, सूफियान खान, अभिषेक शुक्ला, राम सिंह, सुजीत सिंह, नवाब खान, अजय सिंह, अरविंद नायक, शेख आबिद, असफिया आलम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता जेल पहुंचे और दोनों कांग्रेसियों को रिहा कराकर बाहर लाए।
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निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और राजनीतिक द्वेष के तहत जेल भेजा गया। इसी के विरोध में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने धरना देकर ज्ञापन सौंपा था। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे और कलेक्ट्रेट का घेराव कर लाठीचार्ज व गिरफ्तारी के विरोध में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।