मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आशा कार्यकर्ता की कोविड-19 ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर हुई मौत के मामले में उसे मुख्यमंत्री कोरोना योद्धा योजना का लाभ न दिए जाने के मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ और जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने मामले में अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये हैं।
मामला शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील अंतर्गत ग्राम खरपा का है। खरपा ग्राम के निवासी रामशरण शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके अनुसार उनकी पत्नि स्व. सावित्री शर्मा 2010 से आशा कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही थी और कोरोना सर्वे टीम में शामिल थीं। सावित्री शर्मा 10 मई 2021 को ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हुई, जिन्हें सिविल अस्पताल ब्यौहारी में भर्ती कराया गया, जहां कोरोना के कारण उनका ऑक्सीजन लेवल कम पाए जाने पर उन्हें शहडोल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन जिला अस्पताल में भी लगातार ऑक्सीजन लेवल गिरता रहा और उनके फेफड़ों में 50 फीसदी संक्रमण पहुंच गया। इंफेक्शन के चलते 14 मई 2021 को उनकी उपचार दौरान मौत हो गई। जिस पर उनके परिजनों की ओर से सीएमएचओ के माध्यम से सभी दस्तावेजों के साथ कलेक्टर के समक्ष मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा योजना का लाभ दिये जाने का आवेदन किया गया था, लेकिन कलेक्टर ने अक्टूबर 2021 में उनके आवेदन को आरटी-पीसीआर रिपोर्ट न होने के कारण उसे खारिज कर दिया।
आवेदक की ओर से कहा गया कि उन्होंने समस्त दस्तावेजों, रेमडेसिविर इंजेक्शन व कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत हुए उपचार संबंधी सभी दस्तावेजों के साथ आवेदन किया, इसके बाद भी उसे खारिज कर दिया गया, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है। मामले में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य सेवा, कमिश्नर मेडिकल सेवा, कलेक्टर शहडोल और सीएमएचओ शहडोल को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये हैं।