सीहोर जिले के इछावर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
बता दें 22 मार्च 2024 को पीड़िता के पिता बकरी चराने जंगल गए थे। घर लौटने पर उनके बेटे ने बताया कि बहन सामान लेने दुकान गई थी और वापस नहीं आई। जब घरवालों ने पूरे रिश्तेदारों में फोन कर तलाश की और लड़की का कोई पता नहीं चला, तो पिता ने संदेह जताया कि गांव का युवक सोनू जांगड़ा नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले गया है। उन्होंने तत्काल थाने में गुमशुदगी और शंका रिपोर्ट दर्ज कराई।
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मामले में पुलिस ने तलाश शुरू की और 25 मार्च को आरोपी सोनू जांगड़ा के कब्जे से नाबालिग को दस्तयाब किया। आरोपी को भी उसी समय गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह युवक को तीन साल से जानती थी। घटना वाले दिन सोनू का फोन आया कि मैं लेने आ रहा हूं, भाऊखेड़ी जोड़ पर मिलना। विश्वास में आकर वह पहुंची, जहां से आरोपी उसे बाइक पर बैठाकर सीहोर ले गया, फिर भोपाल बस स्टैंड के पास धर्मशाला में ठहराया। यहीं आरोपी ने पहली बार उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
पीड़िता के बयान ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया। उसने बताया कि आरोपी उसे लगातार जगह-जगह ले जाता रहा। भोपाल से सतना और फिर मैहर ले जाकर कई बार उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। पुलिस ने जब दबाव बढ़ाया और शिकायत की भनक आरोपी को लगी, तब वह घबराया और इधर-उधर छिपता रहा। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया और पीड़िता सुरक्षित बरामद कर ली। चिकित्सा परीक्षण और बयान में स्पष्ट हो गया कि आरोपी ने नाबालिग के साथ लगातार दुष्कर्म किया था।
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प्रकरण अदालत में पहुंचा और शासन की ओर से सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव ने पैरवी की। उन्होंने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया। अदालत ने माना कि आरोपी ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपहरण किया, फिर कई दिनों तक उसे लगातार अपनी गिरफ्त में रखकर शारीरिक शोषण किया। न्यायालय ने इसे घिनौना और असहनीय अपराध करार दिया। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर ने आरोपी को दोषी माना और पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने धारा 5(क)/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष सश्रम कारावास, धारा 3(क)/4(1) पॉक्सो एक्ट में 12 वर्ष सश्रम कारावास, धारा 366 व 363 भादवि में 1-1 वर्ष सश्रम कारावास और कुल अर्थदंड 3500 रुपये का फैसला दिया। न्यायालय ने कहा कि नाबालिग पर ऐसा जघन्य अपराध समाज के लिए शर्मनाक है और आरोपी को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए।