पिछले चार सालों से तैयार हो रहे पांडागांव स्थित सीपनदी के ब्रिज से रविवार से आवागमन शुरू हो गया। शनिवार देर शाम को ब्रिज का वर्चुअली लोकापर्ण केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया तो वहीं बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव ने फीता काटकर ब्रिज का लोकापर्ण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने मुख्यमंत्रित्व काल में साढ़े 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर क्षतिग्रस्त हो चुके ब्रिज के निर्माण की सौगात क्षेत्रवासियों को दी गई थी। अब यहां पर आवागमन की समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
आगामी 50 सालों को ध्यान में रखते हुए इस ब्रिज का निर्माण कराया गया है। भार्गव ने कहा कि ऐसी अनेक सौंगाते इस क्षेत्र को दी गई हैं। बुदनी में विकास का सफर निरन्तर जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त जहां पर भी विकास की संभावनाएं हैं, वहां राज्य सरकार के सहयोग से पूरी की जाएगी। संपूर्ण बुधनी विधानसभा क्षेत्र चारों और से सड़कों से जुड़ चुका हैं। अब वह दिन भी दूर नहीं है, जब बुधनी से नसरूल्लागंज तक टू लेन नेशनल हाईवे का निर्माण पूरा होने के बाद सफर आसान हो जाएगा। लोकापर्ण के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मालवीय, पूर्व प्रदेश मंत्री रघुनाथ सिंह भाटी, आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्षा श्रीमती निर्मला सुनिल बारेला, जिला पंचायत महिला बाल विकास सभापित जलज चौहान, मंडल अध्यक्ष दिनेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी व ग्रामीणजन मौजूद थे।
ज्ञातव्य हैं कि जून 2020 में पांडागांव ब्रिज में दरार आ जाने से ब्रिज से आवागमन बंद कर दिया गया था। ग्रामीणों की मांग पर भाजपा सरकार द्वारा तीन करोड़ से भी अधिक की राशि खर्च कर यहां बॉक्स ब्रिज का निर्माण कराया गया था। बरसात के दिनों में सीपनदी ऊफान पर होने से बॉक्स ब्रिज डूब जाता था, जिससे यहां आवागमन बंद हो जाता था। पूरे बारिश के दिनों में वाहन चालकों को सेमलपानी से वासुदेव होकर इंदौर का सफर तय करना पड़ता था। जिसे देखते हुए सरकार द्वारा पांडागांव सीपनदी पर 50 सालों को ध्यान में रखते हुए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के द्वारा 9 करोड़ 48 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। मार्च 2022 में इस ब्रिज को ढहाने का काम शुरू कर दिया गया था।
पांच माह देरी से हुआ लोकार्पण
ब्रिज का ठेका गुजरात की डाली कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। निर्माण एजेंसी द्वारा ब्रिज का लोकापर्ण 30 जून 2024 को करने की बात कहीं गई थी, लेकिन लेटलतीफी के कारण ब्रिज का निर्माण पांच माह देरी से हुआ। इसके चलते जून माह में होने वाले ब्रिज का लोकापर्ण 30 नवम्बर 2024 को किया गया।
50 साल की अवधि को ध्यान में रखकर किया निर्माण
ब्रिज कार्पोरेशन के एसडीओ ऋषभ निरापूरे ने बताया कि ब्रिज का निर्माण आगामी 50 साल की अवधि को ध्यान में रखते हुए ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इस ब्रिज से 77 टन क्षमता तक के वाहन आसानी से निकल सकेंगे। ब्रिज के निर्माण में पूरी सावधानी बरती गई है। आगामी समय में बनने वाले फोरलेन सड़क को ध्यान में रखते हुए इस ब्रिज की चौड़ाई 12 मीटर रखी गई हैं, जिससे वाहनों की क्रासिंग में ब्रिज पर जाम के हालात निर्मित न हो सके। इसके अलावा ब्रिज की लंबाई 147 मीटर है।
1985 में पहली बार हुआ था नदी पर ब्रिज का निर्माण
सीप नदी पर 1985 में ब्रिज का निर्माण किया गया था। निर्माण पूर्ण होने पर कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल बोरा द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था। 37 वर्ष पुराने इस पुल पर क्षमता से अधिक लोड लिए वाहन निकलते रहे, लेकिन इस और अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस पुल से इंदौर, खातेगांव, हरदा, नेमावर, उज्जैन, देवास, खंडवा, ओमकारेश्वर, धार, मनावर, महू की और जाने वाली बसें इस पुल से निकलती है। इंदौर, धार, देवास, उज्जैन की ओर जाने वाले रेत के वाहन भी इस पुल से निकलते हैं एवं इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर,देवास, खंडवा की और जाने वाले अनाज व्यापारियों के अनाज से भरे वाहन एवं परचून का सामान लेकर आने जाने वाले वाहन भी इस मार्ग से निकलते हैं। नागपुर, जबलपुर की और से इंदौर जाने वाले वाहन भी इसी मार्ग से निकलते हैं जो बीते 2 वर्षों से परेशान हो रहे थे। इस ब्रिज में तीन बार दरार आ चुकी थी, जिसके चलते ब्रिज की रिपेरिंग कर ब्रिज से आवागमन शुरू किया गया था। लेकिन जब ब्रिज अधिक क्षतिग्रस्त हो गया तो कलेक्टर द्वारा यहां से आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया था।