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चैत्र नवरात्रि: सलकनपुर विजयासन धाम, जहां रक्तबीज वध के बाद विराजीं पार्वती, 52वें शक्तिपीठ पर उमड़ रही आस्था

Fri, 20 Mar 2026 06:30 AM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

चैत्र नवरात्रि में सलकनपुर विजयासन धाम भक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मंदिर दर्शन से लेकर सुरक्षा तक विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
 
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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
सीहोर स्थित सलकनपुर का मां विजयासन धाम इन दिनों एक बार फिर आस्था के महासागर में डूबने को तैयार है। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। विंध्याचल पर्वत की ऊंचाई पर बसे इस शक्तिपीठ की ख्याति देशभर में फैली हुई है, जहां भक्त अपनी हर मनोकामना पूरी होने की आस लेकर आते हैं।

नवरात्रि में होंगे 16 घंटे दर्शन
चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर के पट सुबह 5:30 बजे पहली आरती के साथ खुलेंगे और रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे। यानी भक्तों को करीब साढ़े 16 घंटे तक लगातार दर्शन का अवसर मिलेगा। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। मंदिर समिति ट्रस्ट के अनुसार इस बार नवरात्र में पांच से दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यही कारण है कि प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ इस धाम की लोकप्रियता को और भी मजबूत बनाती है।
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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
पार्वती का अवतार मानी जाती हैं मां विजयासन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां विजयासन देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं। कथा है कि राक्षस रक्तबीज का वध करने के बाद माता इसी स्थान पर विराजमान हुई थीं। यही स्थान आज विजयासन धाम के रूप में पूजित है। इसे 52वां सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है, जो इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।
 
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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
स्वयंभू प्रतिमा, दिव्यता का अनोखा अनुभव
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माता की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, यानी यह प्राकृतिक रूप से निर्मित है। इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन मात्र से श्रद्धालु आत्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। परिसर में लक्ष्मी, सरस्वती और भैरव बाबा के मंदिर भी स्थित हैं, जो वातावरण को और अधिक पवित्र बनाते हैं।
 

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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित धाम
यह पवित्र मंदिर करीब 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। पहले यहां पहुंचना कठिन था लेकिन अब सीढ़ियों, सड़क मार्ग और रोप वे की सुविधा से हर आयु वर्ग के लोग आसानी से दर्शन कर सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा राहत लेकर आई है।

इस बार रोप वे की क्षमता बढ़ा दी गई है। अब एक केबिन में 12 की जगह 16 लोग सफर कर सकेंगे। इसके अलावा निजी वाहनों को भी मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है, हालांकि भीड़ बढ़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। जरूरत के अनुसार टैक्सियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
 
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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
‘देवी लोक’ बनेगा नया आकर्षण

सलकनपुर धाम में ‘देवी लोक’ का भव्य निर्माण तेजी से चल रहा है। करीब 97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट में नवदुर्गा कॉरिडोर, 64 योगिनियों की मूर्तियां, शक्ति द्वार और भक्ति द्वार जैसी भव्य संरचनाएं बनाई जा रही हैं। यह परियोजना उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित की जा रही है।

नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने बताया कि 200 से अधिक पुलिस जवान तैनात रहेंगे और पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटर किया जाएगा। प्रशासन हर गतिविधि पर नजर रखेगा ताकि कोई अव्यवस्था न हो।
 
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विजयासन माता, सलकनपुर - फोटो : अमर उजाला
गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने पानी की विशेष व्यवस्था की है।  अमृत भवन नामक पानी की टंकी बनाई गई है, जिसमें 60 नल लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर पीने के पानी की कोई समस्या नहीं रहेगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए छाया और कालीन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

सलकनपुर देवी धाम ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने बताया कि दर्शनार्थियों के लिए मैट, छाया और ठंडे पानी की विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें 'अमृत भवन' नामक नई पानी की टंकी और 60 नल शामिल हैं। मंदिर के पट सुबह 5.30 से रात 10 बजे तक खुले रहेंगे और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे चालू हैं। रोप वे और गाड़ियों की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। मंदिर के भव्य विस्तार यानी 'देवीलोक धाम' का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि बाउंड्री वॉल, कुछ पहुंच मार्ग और ओडिशा से आने वाली विशेष मूर्तियों का काम अभी शेष है। उम्मीद जताई गई है कि अगली नवरात्रि तक यह प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
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