प्रदेश के सीहोर जिले में नाबालिग बेटी से दुष्कर्म कर गर्भवती करने वाले पिता को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक जेल की सजा सुनाई गई है। नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म भी दिया था।
अभियोजन से मिली जानकारी के अनुसार, उषा तिवारी प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नसरुल्लागंज ने अभियुक्त जसमन सिंह पदम पति गोवर्धन सिंह उम्र 37 साल को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास, जो शेष संपूर्ण जीवन काल के लिए होगा और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। विशेष लोक अभियोजक शिरीष उपासनी ने बताया कि 11 जनवरी 2023 को पीड़िता ने शिकायत की थी कि वह नसरुल्लागंज में निवास करती है। छह मार्च 2022 को उसकी मम्मी और दोनों भाई घर में सो रहे थे। परिवार के सभी लोग साथ में एक ही कमरे में सोते हैं। वह मम्मी के बाजू में सो रही थी, तभी पिताजी काम करके बाहर से आए और गलत काम किया। इसके बाद उन्होंने मेरे साथ चार-पांच बार गलत काम किया, जिससे मैं गर्भवती हो गई।
'पापा ने टेस्ट भी करवाया'
फिर मैंने यह बात पापा को बताई तो पापा ने बोला कि सफाई करवा देते हैं। पापा मुझे सरकारी अस्पताल में लेकर गए, मेरा टेस्ट करवाया था। मेरा पेट बड़ा होने लगा तो मैंने स्कूल जाना भी छोड़ दिया। सात जनवरी 2023 को मैंने एक बच्ची को जन्म दिया, बच्ची के पिता मेरे पापा हैं। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना भैरूंदा में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मंगलवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश उषा तिवारी ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्षीगण की साक्ष्य, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए अभियुक्त को दोषी पाया। न्यायालय ने पीड़ित के उज्जवल भविष्य और शिक्षा के लिए प्रतिकर स्वरूप दो लाख रुपये दिलवाए जाने का आदेश पारित किया है। शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक शिरीष उपासनी तहसील नसरुल्लागंज ने की।
क्या होती है प्राकृतिक जीवन शेष तक की सजा
प्राकृतिक जीवन शेष सजा का मतलब है कि अपराधी को अपना बाकी जीवन जेल में बिताना होगा। इसे आजीवन कारावास या उम्रकैद भी कहा जाता है, यह एक गंभीर सजा है और आमतौर पर सबसे जघन्य अपराधों के लिए दी जाती है।