सीहोर जिले के बिलकिसगंज में मंगलवार को रंगपंचमी मनाई गई।
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भागवत भूषण मिश्रा ने कहा कि मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर में चौसठ योगिनी जहां झांझर बजाती थी उस स्थान का नाम झागरिया है, झांझर से नाम पड़ा झागरिया वर्षों से यही नाम रहा है इसलिए इसे झागरिया ही बोलेंगे। सभी संकल्प लीजिए। पंडित प्रदीप मिश्रा ने स्थान व झागरिया के इतिहास व महत्व से सभी को अवगत कराया। क्षेत्रीय विधायक से आग्रह किया कि बिलकिसगंज का प्राचीन नाम झागरिया किया जाए तथा सभी उपस्थितों को संकल्प दिलाया कि हम झागरिया ही बोलेंगे।
बता दें कि सीहोर जिले के बिलकिसगंज में मंगलवार को रंगपंचमी मनाई गई। एक किलोमीटर लंबे ऐतिहासिक महादेव की होली के चल समारोह में हजारों लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई। क्षेत्र में हजार से अधिक गुलाल की बोरियों के अलावा दो क्विंटल से अधिक फूलों से चल समारोह का स्वागत किया गया। पंडित मिश्रा ने महादेव के गीत गाए व मातृशक्ति की उपस्थिति के बीच कहा कि प्रत्येक वर्ष हर एक शिवालय में इस तरह से होली मनाना चाहिए।
भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में मंगलवार को क्षेत्र में जमकर महादेव की होली खेली गई। इस मौके पर सीहोर-बिलकिसगंज पर अनेक स्थानों पर पंडित मिश्रा का भव्य स्वागत किया गया। पहली बार रंगपंचमी के अवसर पर विद्युत मंडल स्थित शिव मंदिर के पास से प्रारंभ हुआ महादेव की होली का चल समारोह मुख्य मार्गों से होते हुए थाने के सामने शिव मंदिर पर सम्पन्न हुआ। चल समारोह हजारों की संख्या में महिला-पुरुषों, नवयुवक व बच्चे नाचते गाते हुए उत्साह के साथ रंगों में सराबोर होते हुए सम्मिलित हुए। दूर-दूर से शामिल होने आए लोग भी ढोल और डीजे एवं बैंड बाजे पर थिरकते हुए बस स्टैंड पहुंचे।
चल समारोह में जमकर बरसा रंग- गुलाल
चल समारोह में महिला पुरूषों सहित बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। डीजे-बैंडबाजे, ढोल-नगाड़ों से निकले चल समारोह में रंग-गुलाल उड़ाने के साथ फूल बरसाए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर लोग थिरक रहे थे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बिलकिसगंज में पहली बार इस तरह का रंगपंचमी पर चल समारोह निकला। रंगपंचमी चल समारोह एक किलोमीटर लंबा था। पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद रही एवं सुबह से ही सतर्क रही। चल समारोह उत्साह व आनंद के वातावरण में निकला।