महाकुंभ में भगदड़ के बाद से बुजुर्ग दंपती की कोई जानकारी नहीं मिलने से परिजन और रिश्तेदार सभी घर के लोग काफी परेशान थे। जब दंपती सकुशल अपने घर पहुंचे तो अपनी आपबीती घर वालों को बताई। दंपती ने कहा कि हमारे साथी भगदड़ में बिछड़ गए थे और हमारा सारा सामान भी गुम हो गया। हम लोग किसी तरह से अपनी जान बचाकर वहां से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे और परिजनों के बीच पहुंचे।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के महाकुंभ संगम में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान में हुई भगदड़ से बचकर चार दिन बाद सतना के किचवरिया गांव के बुजुर्ग दंपती सकुशल अब अपने घर पहुंचे हैं। बुजुर्ग दंपती ने बताया कि उस घटना के बाद रास्ते बंद होने से करीब 55 किलोमीटर पैदल चले और फिर बस से शुक्रवार को अपने घर पहुंचे हैं। अचानक से खबर मिलना बंद होने के बाद जब दंपती घर पहुंचे तो आसपास के लोग और रिश्तेदार सहित सभी लोग मिलने पहुंचे हैं।
भगदड़ के बाद 55 किलोमीटर पैदल चले बुजुर्ग दंपती
सतना जिले के किचवरिया गांव के 70 वर्षीय बलिकरण सिंह, 60 वर्षीय पत्नी गंगा देवी सिंह ने बताया कि महाकुंभ के लिए जाने वाली स्पेशल बस से प्रयागराज के लिए गए थे। मौनी अमावस्या में स्नान के दौरान संगम नोज में हुई भगदड़ में दंपती तो सुरक्षित रहे। लेकिन उनके साथ गए लोग, समान सहित गुम हो गए। वो रात किसी तरह गुजरने के बाद दोनों बुजुर्ग वापस सतना अपने घर आना चाहते थे। लेकिन सारे रास्ते बंद हो चुके थे। दोनों बुजुर्ग एक दूसरे का हाथ पकड़कर पैदल 50 से 55 किलोमीटर चलने के बाद फूलपुर पहुंचे। वहां से सरकारी बस के सहारे बार्डर चाकघाट पहुंचे।
दंपती ने सुनाया महाकुंभ के भगदड़ का किस्सा
भगदड़ के बाद बार्डर बंद होने से घर जाने का साधन न होने की वजह से दंपती ढाबे में पड़े रहे 24 घंटे बाद बार्डर खुलने पर बस से सेमरिया, फिर टिकरी, फिर अपने किचवरिया गांव पहुंचे। मौनी अमावस्या में भगदड़ के बाद बुजुर्ग दंपती के चार दिन तक घर न पहुंचने और कोई खोज खबर न मिलने से परिजन, रिश्तेदार और गांव वाले सभी लोग बहुत परेशान थे। यूं मानो तो दोनों बुजुर्ग दंपती मौत के मुंह से वापस आए हैं।