मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अपर सचिव चंद्रशेखर बोरकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर से आज मुलाकात कर उनसे बार-बार अनुरोध कर अनशन तोड़ने का भरसक प्रयास किया, लेकिन मेधा ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिये उचित पुनर्वास की मांग को लेकर मेधा अपने 11अन्य साथियों के साथ मध्यप्रदेश के धार जिले के चिखल्दा गांव में 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठी हैं और आज उनके अनशन का 10वां दिन है।
बोरकर के नेतृत्व वाली इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय संत भय्यूजी महाराज, धार के कलेक्टर श्रीमन शुक्ल, इंदौर के संभागायुक्त संजय दुबे एवं इंदौर के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक अजय शर्मा शामिल थे। यह प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री चौहान द्वारा कल मेधा को किये गये ट्वीट के एक दिन बाद भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने कल मेधा को ट्वीट कर कहा था, ‘‘सभी विस्थापितों के हितों की चिंता करना मेरा कर्तव्य है। मैं और पूरा प्रशासन उनके साथ खड़े हैं। आप व आपके स्वास्थ्य की चिंता है। निवेदन है अनशन समाप्त करें।’’ चौहान ने ट्वीट में आगे लिखा था, ‘‘मैंने प्रभावितों से व्यक्तिगत रूप से बात की है और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए आदेश जारी कर दिये हैं।’’
इस पर मेधा ने कल जवाब दिया था, ‘‘ट्विटर पर उपवास नहीं तोड सकती। यदि लीगल अथारिटी टीम आएगी और डूब प्रभावितों के मुद्दों पर एक्शन लेगी व बांध में पानी भरना बंद कर पहले पुनर्वास करेंगे, तभी आंदोलन खत्म होगा।’’ विस्थापितों के लडाई लड रही कार्यकर्ता हिम्शी सिंह ने धार से ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस प्रतिनिधिमंडल के पास सरकार का अथारिटी लेटर नहीं था।
इसलिए मेधाजी ने इस प्रतिनिधिमंडल का अनुरोध स्वीकार नहीं किया और अनशन तोडने से मना कर दिया।’’ हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल धार के कलेक्टर श्रीमन शुक्ल ने कहा कि हमने मेधाजी की मांगों को नोट कर लिया है। हमने स्थानीय मांगों का पहले ही समाधान करना शुरू कर दिया है।’’ शुक्ल ने स्वीकार किया कि प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध के बाद भी मेधा ने अपना अनशन नहीं तोडा है।