चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर सागर जिले के देवरी कलां में एक अनूठी आस्था देखने को मिली, जहां भक्त अभिषेक प्रजापति ने पुत्र प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर शरीर पर जवारे बोकर नौ दिनों से अन्न त्याग कर कठोर तपस्या की।
चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर बुंदेलखंड की धरती से आस्था और अटूट विश्वास की एक विहंगम तस्वीर सामने आई है। सागर जिले के देवरी कलां स्थित पृथ्वी वार्ड में एक भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर शरीर पर जवारे बोकर कठिन तपस्या कर रहे हैं। भक्त नितेश उर्फ अभिषेक प्रजापति ने पिछले नौ दिनों से अन्न का त्याग कर रखा है और वे केवल नर्मदा जल ग्रहण कर जमीन पर लेटे हुए हैं।
विज्ञापन
तीन बेटियों के बाद हुई पुत्र रत्न की प्राप्ति
श्रद्धालु अभिषेक प्रजापति ने बताया कि उन्होंने माँ बीजासेन के दरबार में एक विशेष मन्नत मांगी थी। उनके घर में तीन बेटियां थीं, जिसके बाद उन्होंने पुत्र प्राप्ति की कामना करते हुए संकल्प लिया था कि यदि उन्हें पुत्र रत्न प्राप्त होता है, तो वे अपने शरीर पर जवारे बोकर नौ दिनों तक अन्न त्याग करेंगे। माँ बीजासेन ने उनकी पुकार सुनी और दो वर्ष पूर्व उनके घर पुत्र 'देवनारायण' का जन्म हुआ।
लगातार दूसरे वर्ष कर रहे हैं तपस्या
अपनी प्रतिज्ञा को दोहराते हुए अभिषेक इस वर्ष भी लगातार दूसरी बार इस कठिन साधना में लीन हैं। उनके पेट पर जवारे बोए गए हैं और वे नौ दिनों तक हिले-डुले बिना जमीन पर ही विश्राम करते हैं। इस दौरान वे केवल पवित्र नर्मदा जल का सेवन कर रहे हैं। उनके घर के समीप स्थित माँ बीजासेन के दीवाले में श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है।
अखंड ज्योति और सप्तशती का पाठ
भक्ति के इस केंद्र पर न केवल जवारे बोए गए हैं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में खप्पर भी रखे गए हैं। पंडित लखन महाराज द्वारा यहाँ प्रतिदिन विधि-विधान से पूजन और दुर्गा सप्तशती का अखंड पाठ किया जा रहा है। नौ दिनों से यहां अखंड ज्योति प्रज्वलित है, जो क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और अटूट श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।