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सागर शराबकांड : जानकारी होने के बावजूद क्यों बेची गई जहरीली शराब? हत्या का धारा जोड़ने की तैयारी

Fri, 02 Oct 2026 05:18 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

सागर के बंडा में जहरीली शराब से 36 मौतों के मामले में पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों को शराब के अमानक और जहरीली होने की जानकारी मिल गई थी। इसके बावजूद बिक्री जारी रखी गई। पुलिस ने 52 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है, जिनमें 36 गिरफ्तार हो चुके हैं।
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सागर शराबकांड में पुलिस जांच में नया खुलासा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से हुई 36 मौतों के मामले में पुलिस की जांच में बड़ा पर्दाफाश हुआ है। मुख्य आरोपियों को शराब के अमानक और जानलेवा होने की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इसके बावजूद उन्होंने न तो शराब की आपूर्ति रोकी और न ही प्रशासन को कोई सूचना दी। पुलिस ने मामले में 52 लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें से 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जुटाए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब आरोपियों के खिलाफ हत्या की धारा जोड़ने की कानूनी तैयारी कर रही है।
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जेल से मिले सुराग से बेनकाब हुआ गिरोह
घटना के बाद अस्पताल में 5 सितंबर की रात से मरीजों का पहुंचना शुरू हुआ था। मरीजों को उल्टी, बेहोशी और आंखों से धुंधला दिखना जैसी समस्याएं थीं। देर रात मौतों का सिलसिला शुरू होने पर पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआत में पुलिस ने ततरवारा निवासी चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू राजा को हिरासत में लिया, लेकिन वह पूछताछ में सच्चाई छिपाता रहा। इस दौरान पुलिस को केंद्रीय जेल सागर से एक गोपनीय इनपुट मिला। अगस्त महीने में जेल में बंद शिवांजय सिंह राजपूत ने अपने साथी को बताया था कि उसके पास शराब बनाने का फॉर्मूला उपलब्ध है। पुलिस ने शिवांजय की कॉल डिटेल और लोकेशन की पड़ताल की तो उसका संबंध चंद्रभान से निकला। इसी सुराग के जरिये पुलिस पूरे अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।

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दिल्ली से मुरैना तक फैला अवैध नेटवर्क
अवैध शराब तैयार करने के लिए एक सुसंगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क काम कर रहा था। दिल्ली की आरएन केमिकल फर्म से पांच ड्रम औद्योगिक स्प्रिट और थिनर मंगाया गया था। शिवांजय फर्जी ट्रांसपोर्ट बिल्टी के सहारे किराए की पिकअप से इस केमिकल को ततरवारा लाया था। वहीं, फरार मुख्य आरोपी रवि लखेरा को 11 सितंबर को मुठभेड़ में पकड़ा गया। रवि के जरिये मुरैना के दिनेश शिवहरे और उसकी टीम का संपर्क सामने आया। आरोपियों ने ततरवारा में चंद्रभान के घर पर शराब बनाने का ठिकाना बनाया। ग्वालियर की राय कॉलोनी से नकली रैपर कोरियर से मंगाए गए, जबकि बोतलें, ढक्कन और कार्टन निजी वाहनों व ट्रांसपोर्ट के जरिये पहुंचाए गए। अवैध धंधे को कानूनी ढाल देने के लिए आरोपियों ने लाइसेंसी ठेकेदारों के साथ सांठगांठ की थी। चंद्रभान ने लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और मनीष लोधी के साथ मिलकर बरेठी स्थित मदिरा दुकान में अघोषित साझेदारी की थी, ताकि लाइसेंसी दुकान की आड़ में गांवों तक नकली शराब खपाई जा सके।
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अमानक शराब का पता चलने पर भी जारी रखी बिक्री
आरोपियों ने 3 सितंबर को चंद्रभान के घर पर नकली शराब तैयार की। इसके बाद इसे नौराज, गूगरा, छापरी, जगथर, बमूराभेड़ा और पाटन समेत आसपास के कई गांवों के एजेंटों तक पहुंचा दिया गया। 4 सितंबर को दिनेश शिवहरे और देवा जाटव ने शराब को चखा तो दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। 5 सितंबर को जब दिनेश की स्थिति अधिक गंभीर हुई तो आरोपियों को स्पष्ट समझ आ गया कि शराब अत्यंत अमानक व जहरीली है। इसके बावजूद आर्थिक नुकसान से बचने के लिए उन्होंने सप्लाई रोकने या लोगों को सचेत करने के बजाय जहरीली शराब की बिक्री जारी रखी। दिनेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से चंद्रभान उसे अपने जोखिम पर डिस्चार्ज कराकर मुरैना ले जा रहा था, परंतु रास्ते में ही दिनेश की मौत हो गई। आरोपियों ने परिजनों को मौत का कारण दिल का दौरा बताया, लेकिन अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में चंद्रभान की उपस्थिति से पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो गया। इस शराब को चखने वाले दूसरे व्यक्ति देवा जाटव की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई।
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