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मध्यप्रदेश में कोरोना: आज 90 नए केस, संक्रमितों की संख्या 3341 हुई, अब तक 200 मौतें

Fri, 08 May 2020 08:44 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, इंदौर
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सैनिटाइज करते कर्मचारी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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मध्य प्रदेश में आज कोरोना के 90 नए मामले सामने आए। राज्य में कोरोना से संक्रनमित मरीजों की कुल संख्या 3341 हो गई है, जिनमें 1349 लोग ठीक हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। कोरोना के कारण राज्य में अब तक 200 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बात की जानकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग ने दी। 

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इंदौर में दो महीने का बच्चा कोरोना के संक्रमण से मुक्त हुआ
'रेड जोन' में शामिल इंदौर जिले में महज दो महीने के बच्चे ने कोविड-19 के खिलाफ जीत की नजीर पेश की है। अस्पताल में इलाज के साथ ही अपनी अच्छी प्रतिरोधक क्षमता के बूते यह नौनिहाल इस महामारी के संक्रमण से मुक्त हो गया है।

शहर के चोइथराम अस्पताल की वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ रश्मि शाद ने शुक्रवार को बताया, 'कोविड-19 से संक्रमित पाये जाने के बाद दो महीने का बच्चा एक मई को हमारे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस वक्त उसे सांस लेने में थोड़ी परेशानी और बुखार था।'
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उन्होंने बताया, 'बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है। इस कारण दवाओं का उस पर जल्दी असर हुआ। इलाज के बाद लगातार दो जांचों में वह कोविड-19 के संक्रमण से मुक्त पाया गया। इसके बाद उसे अस्पताल से बुधवार को छुट्टी दे दी गई।'

शाद ने बताया कि चूंकि बच्चा बहुत छोटा है और उसे मां की देखभाल की जरूरत है। इसलिए उसकी मां मास्क पहनकर और संक्रमण से बचाव के अन्य उपाय करते हुए अस्पताल में भी बच्चे को दूध पिला रही थी। उन्होंने बताया कि जांच में बच्चे के माता-पिता कोविड-19 से संक्रमित नहीं पाए गए हैं। बच्चे को उसके एक नजदीकी रिश्तेदार से इस महामारी का संक्रमण हुआ था।

शाद ने बताया, 'अबोध बच्चे को तो पता ही नहीं था कि उसे क्या हुआ है? लेकिन बच्चे के माता-पिता उसके स्वास्थ्य को लेकर जाहिर तौर पर चिंतित हो रहे थे। हम काउंसलिंग के जरिये उसके माता-पिता को लगातार समझा रहे थे कि वह जल्द ठीक हो जाएगा।' उत्साहित शिशु रोग विशेषज्ञ ने कहा, '..और देखिs, ऐसा ही हुआ। बच्चा कोविड-19 को हराकर घर लौट चुका है।'

इंदौर में 1700 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हैं
मध्यप्रदेश का इंदौर शहर कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित है। यहां 1700 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हैं और इस खतरनाक वायरस के चलते यहां 86 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, शहर के एक अस्पताल पर मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। 

दरअसल, यहां के एक अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसमें मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल की लापरवाही के चलते पिछले छह घंटे में चार मरीजों की मौत हुई है।  वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए इस चिकित्सा संस्थान पर शुक्रवार से अस्थायी रोक लगा दी। मृतकों में कोरोना वायरस का एक संदिग्ध मरीज भी शामिल है।

अस्पताल को सैनिटाइज करने के नाम पर इलाज में बरती गई लापरवाही
वायरल वीडियो में शहर के गोकुलदास अस्पताल में मरीजों के परिजन अपना दर्द बयां कर रहे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन इस चिकित्सा संस्थान को सैनिटाइज (संक्रमणमुक्त) करने के लिए खाली कराना चाहता है। इसलिए मरीजों के इलाज में ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिस कारण मरीजों की सिलसिलेवार मौत हो रही है।

जब वीडियो वायरल होना शुरू हुआ तो प्रशासन की नींद खुली। प्रशासन ने आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को जांच के लिए गोकुलदास अस्पताल भेजा। यह अस्पताल येलो श्रेणी वाला है, जहां कोरोना के संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा था। 

अस्पताल में भर्ती 14 मरीजों को स्थानांतरित किया गया, संचालन पर लगी रोक

अस्पताल की जांच के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) प्रवीण जड़िया ने बताया कि हमने अस्पताल से दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। साथ ही इसके संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। 

उन्होंने बताया कि शुरूआती जांच के दौरान हमें पता चला है कि अस्पताल में गुरुवार को छह घंटे के भीतर चार मरीजों की मौत हुई थी। मृतकों में शामिल तीन लोग जांच में कोविड-19 से संक्रमित नहीं पाए गए थे, जबकि एक अन्य मरीज की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया रहा है। 

सीएमएचओ ने बताया कि गोकुलदास हॉस्पिटल में भर्ती 14 मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजा जा रहा है। मरीजों के तीमारदारों के आरोपों पर गोकुलदास अस्पताल के प्रबंधन की प्रतिक्रिया कई प्रयासों के बावजूद नहीं मिल सकी।
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पहले भी सामने आए ऐसे मामले

बहरहाल, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब कोराना वायरस संकट में सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश के निजी अस्पतालों की पोल खुली हो। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर सामने आए अलग-अलग वीडियो में इन अस्पतालों पर विभिन्न बीमारियों के मरीजों को बिना इलाज लौटाए जाने, मोटी फीस वसूलने और कोविड-19 की जांच रिपोर्ट में संक्रमित नहीं पाए जाने के बाद भी मरीजों को वक्त पर छुट्टी नहीं दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता और जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने कहा कि तमाम शिकायतों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा निजी अस्पतालों पर अब तक लगाम नहीं कसी जा सकी है। हमारी मांग है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर सूबे के सारे निजी अस्पतालों का प्रबंधन पूरी तरह सरकारी हाथों में लिए जाने का फैसला तुरंत किया जाना चाहिए।

इंदौर देश में कोरोना वायरस के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिले में कोविड-19 के मरीजों की तादाद 1,727 पर पहुंच गई है। इनमें से 86 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।
 

 
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