शुक्रवार को समीक्षा बैठक लेने के लिए राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर मीडिया द्वारा पूछे गए प्रश्न पर भाजपा और पीएम मोदी को कटघरे में खड़ा कर दिया। मीडिया के समक्ष जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी संतों से बात हुई है, जिसमें ये बात निकलकर सामने आई है कि निर्माणधीन मंदिर के अंदर प्राण प्रतिष्ठा होना उचित नहीं है, ये शास्त्र है और शास्त्रों के आधार पर ही हमारे धर्म का पालन हजारों सालों से होता आया है और जो विधि है उसके आधार पर ही सब होता है।
ये नफरत फैला रहे हैं
उन्होंने कहा कि इसका उल्लंघन क्यों किया के रहा है, किस उद्देश्य से किया जा रहा है नहीं पता। उन्होंने कहा कि दो से ढाई महीने के बाद रामनवमी का त्योहार आने वाला है, भगवान राम का जन्मदिन है, उस दिन प्राण प्रतिष्ठा कर लेते। इसलिए हमने शुरू से यही कहा है कि ये धर्म का दुरुपयोग राजनीति के लिए कर रहे हैं, धर्म को धर्मांता में परिवर्तित करके ये नफरत फैला रहे हैं, ये दरअसल, राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं, जिसका हम विरोध कर रहे हैं।
शंकराचार्य जी इसका विरोध कर रहे हैं
वहीं, कांग्रेस के निमंत्रण को अस्वीकार करने को लेकर उन्होंने कहा कि भगवान राम के मंदिर में दर्शन करने के लिए पहली बात तो ये की निमंत्रण की कोई आवश्यकता नहीं है, जब बुलावा आता है, हम चले जाते है। दूसरी बात यह कि इस आयोजन को इन्होंने (बीजेपी) पूरी तरह से राजनीतिक बना दिया। शंकराचार्य जी इसका विरोध कर रहे हैं, सारे राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, वो इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं और इसी बात से कांग्रेस को आपत्ति है। इसलिए हम नहीं जा रहे है, लेकिन जैसे ही निर्माण पूरा हो जाएगा हम लोग जाएंगे और जरूर जायेंगे।
इनका धर्म से कोई लेना देना नहीं
आखिरी बात में उन्होंने उक्त भूमि के विवाद को लेकर कहा कि इनका मकसद मंदिर निर्माण का नहीं था, बल्कि इनका मकसद मस्जिद गिराकर मंदिर-मस्जिद का झगड़ा कराने का था। क्योंकि जहां निर्माण हो रहा है वो भूमि नरसिम्हा राव ने अधिग्रहण की थी। इनका काम सिर्फ नफरत फैलाना है धर्म से कोई लेना देना नहीं है।