राजगढ़ जिला जेल में लगभग एक महीने पूर्व से निरूद्ध खिलचीपुर थाना क्षेत्र के सेकनपुर गांव के लगभग अमृतलाल (65) पिता शंकरलाल की शुक्रवार शाम अचानक तबियत बिगड़ने के कारण जिला अस्पताल में मौत हो गई। शनिवार सुबह जिला अस्पताल में न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम कराया गया।
पीएम के दौरान जिला अस्पताल पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने हंगामा खड़ा कर दिया और जेल प्रबंधन के साथ-साथ खिलचीपुर पुलिस व शराब ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की। वहीं, एडिशनल एसपी मनकामना प्रसाद ने दोषियों पर जांच के पश्चात सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। ग्रामीणों के शिकायती आवेदन के अनुसार, जेल में बंद बंदी दौलतराम पिता शंकरलाल निवासी सेकनपुर को 16 अगस्त को खिलचीपुर पुलिस ने धारा 34/2 आबकारी एक्ट के फर्जी प्रकरण में गिरफ्तार किया था। इसमें गवाह के रूप में मांगीलाल पिता रतनलाल, कालूराम पिता भेरूलाल और भगवान सिंह पिता कंवरलाल भिलाला मौके पर ही मौजूद थे। जहां पुलिस-प्रशासन और शराब ठेकेदार सोनू लववंशी, रामेश्वर लववंशी और रामदयाल लववंशी की मिलीभगत से 50 हज़ार रुपये की रिश्वत की मांग की गई और न देने पर मृतक दौलतराम पर झूठा केस बनाकर जिला जेल में भेज दिया गया।
मृतक की जमानत के लिए जब हमने खिलचीपुर थाने में अर्जी लगाई तो बीट प्रभारी द्वारा 50 हज़ार रुपये की रिश्वत मांगी गई और 20 हज़ार देने के पश्चात 15 सितंबर को एक माह के लगभग हो जाने के बाद संबंधित प्रकरण का चालान न्यायालय में पेश किया गया। जहां 15 सितंबर की शाम को पुलिस की कस्टडी में उनकी मौत हो गई। ऐसे में ग्रामीणों में मृतक की मौत के मामले में लिप्त आरोपी शराब ठेकेदार व खिलचीपुर पुलिस के विरूद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं, गवाहों में से एक चश्मदीद कालूराम ने मीडिया को बताया कि शराब ठेकेदार की गाड़ी आई, जिसमें पुलिस भी थी। शराब की पेटी किसी गड्ढे में से उठाकर लेकर आए और मृतक पर केस बनाकर उसे जेल भेज दिया, जिनकी 15 सितंबर की रात में अचानक मौत हो गई। इसकी सूचना जेल प्रबंधन के द्वारा देर रात में दी गई, जबकि उनके साथ ऐसी कोई परेशानी या बीमारी नहीं थी कि उनकी मौत हो सके।
ग्रामीणों के हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंचे एडिशनल एसपी के समक्ष भी मृतक के परीजन व ग्रामीण उनके द्वारा खिलचीपुर पुलिस, शराब ठेकेदार व जेल प्रबंधन पर लगाए गए आरोप पर कायम रहे और दोषियों के विरूद्ध त्वरित व उचित कार्रवाई करने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार करने की मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों को मौके पर मौजूद अपर कलेक्टर शिव प्रसाद मंडराह व एडिशनल एसपी के द्वारा उचित कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया गया।
ऐसे में पीएम के दौरान ही मामले से सबंधित खिलचीपुर पुलिस व शराब ठेकेदार का एक और मामला निकलकर सामने आया, जिसमें पास के गांव के एक ग्रामीण ने मीडिया को बताया कि हमारे गांव के मुख्य चौराहे पर एक शराब की दुकान है, जिसके पास में ही एक स्कूल भी है, जिसे हटवाने के लिए हम सभी अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं। हमारे गांव के पास ही स्थित सेकनपुर गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति पर शराब ठेकेदार की मिलीभगत से खिलचीपुर पुलिस ने झूठा प्रकरण दर्ज किया और उन्हें जेल भेज दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। उन्हीं के शव के लिए हम यहां आए हैं। लगभग तीन माह पूर्व से हम उक्त शराब के ठेके व ठेकेदार की शिकायत करते आ रहे हैं। लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। हाल ही में मौके पर ही हमने एडिशनल एसपी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवाई है और उन्होंने हमें जांच के पश्चात उचित कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया है।
जेल उपाधीक्षक नारायण सिंह राणा का कहना है, 16 अगस्त को मृतक अमृतलाल पिता शंकरलाल को जेल में निरूद्ध किया गया था। 15 सितंबर शाम चार से पांच बजे के लगभग उनकी तबियत बिगड़ी और जेल में ही मेल नर्स के द्वारा उनका प्राथमिक उपचार किया गया, जिसके पश्चात उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां लगभग दो से तीन घंटे में उनकी मौत हो गई। मामले की न्यायिक जांच वारिष्ठ अधिकारियों के द्वारा की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, एडिशनल एसपी मनकामना प्रसाद का कहना है कि मृतक के परिजनों व ग्रामीणों ने चार बिन्दुओं की शिकायत मेरे समक्ष की है, जिसमें ग्रामीणों के द्वारा कहा गया कि मृतक के ऊपर 34(2) आबकारी एक्ट के तहत जो प्रकरण दर्ज किया गया है, वह गलत है और अन्य गांव के लोगों पर जो प्रकरण दर्ज किए गए हैं, वह भी गलत है। तीसरा यह कि गांव में शराब ठेका जंहा स्थापित है, वह गलत है और चौथा यह कि जेल प्रशासन के द्वारा उनसे अवैध रूप से रुपयों की मांग की गई है। मैंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि मैं स्वयं, एडीएम साहब और जेल उपाधीक्षक नारायण सिंह राणा पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच करेंगे और दोषियों को मुक्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, कैदी की मौत के मामले में जिला अस्पताल के एमडी मेडीसिन डॉ सुधीर कलावत का कहना है कि हॉस्पिटल में करीब छह से 6:30 के लगभग कैदी को लाया गया था। उस समय उसकी गंभीर स्थिति थी। ऑक्सीजन उसका कम से कम 70 प्रतिशत था और बीपी 60/40 था। उसका तुरंत ट्रीटमेंट करके हमने उसको भोपाल के लिए रेफर किया था, बेहतर उपचार के लिए उसके पहले की मुझे कोई जानकारी नहीं है।