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MP Election: कुछ अलग करने के चक्कर में ट्रोल हो रहे कांग्रेस-BJP प्रत्याशी; कोई चाय बना रहा, कोई छाप रहा गारा

Fri, 03 Nov 2023 05:13 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़

सार

Assembly Elections 2023: राजगढ़ में कुछ अलग करने के चक्कर में कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी ट्रोल हो रहे हैं। दरअसल, चुनाव के लिए वोट मांगने के चक्कर में कोई चाय बनाता दिख रहा है। वहीं, कोई गारा छाप रहा। भीम आर्मी की ओर से कहा गया कि यह सिर्फ चुनावी नौटंकी है। जब दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने और मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता तब सामने क्यों नहीं आते।
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चाय बनाते भाजपा नेता और गारा छापतीं कांग्रेस कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में आगामी दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव करीब हैं। अभी हर दल का प्रत्याशी अपने आपको अलग बताने और दिखाने की होड़ में है। लेकिन उनके कारनामे उन्हें प्रसिद्ध करने की बजाय ट्रोल करवाते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र से सामने आया है। यह सीट एससी कोटे के लिए आरक्षित है। जंहा से भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व विधायक गौतम टेटवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने उनकी पूर्व महिला प्रत्याशी कला महेश मालवीय को दोबारा से मौका दिया है।

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उक्त भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। उसमें वे अपने आपको अलग साबित करने में लगे हैं। एक ओर जहां भाजपा प्रत्याशी गौतम टेटवाल चौराहे पर चाय बनाते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस की महिला प्रत्याशी कला महेश मालवीय एक परिवार के कच्चे मकान में गारा छापने में मदद करती हुईं नजर आ रही हैं। दोनों वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से उनके कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें एक दूसरे से अलग साबित करने के लिए पोस्ट किए गए। लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों के वीडियो अब उन्हें ट्रोल करते हुए नजर आ रहे हैं। मामले में भीम आर्मी ने एंट्री करते हुए इसे चुनावी नौटंकी बताया है।

भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव राजेश गढ़वाल ने कहा कि 70 वर्षों तक कांग्रेस सत्ता पर काबिज रही। और लगभग 20 वर्षों से मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में है। अगर ये जनप्रतीनिधि सत्ता के रहते हुए जनता के लिए काम करते तो इस तरह की ड्रामेबाजी करने की इन्हें जरूरत नहीं पड़ती। सारंगपुर सीट आरक्षित होने के बावजूद भी कभी दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने या उन्हें मंदिर में प्रवेश न करने देने जैसे मामलों में ये जनप्रतिनिधि कभी आगे नहीं आते। इस तरह की ड्रामेबाजी से दलितों का कोई उत्थान नहीं होगा। यह सिर्फ चुनावी नौटंकी है और जनता समझदार है, वह सब कुछ समझती है।

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