मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज हो गई है।
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आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते का नाम प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की दौड़ में सबसे आगे है। दूसरा नाम खंडवा से सांसद चुने गए नंदकुमार सिंह चौहान का सामने आ रहा है।
स्थानीय शासन निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी भाजपा हलकों में लिया जा रहा है, लेकिन उनकी संभावना नगण्य है। वह खुद भी ऐसी किसी संभावना को नकार रहे हैं।
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भाजपा की एक नेता-एक पद की नीति
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले नरेंद्र सिंह तोमर को मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद ही नहीं मिला, बल्कि खान और इस्पात जैसे अहम मंत्रालय मिले हैं।
तोमर ने ग्वालियर में कांग्रेस के अशोक सिंह को लोकसभा चुनाव में हराया है, भले ही उनकी जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहा। तोमर ने ही विधानसभा चुनावों में प्रदेश भाजपा का नेतृत्व किया था।
भाजपा में एक नेता-एक पद की नीति को देखते हुए स्पष्ट है कि नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद को छोड़ना पड़ेगा। उनकी जगह लेने के लिए फग्गनसिंह कुलस्ते का नाम सबसे आगे है।
फग्गनसिंह कुलस्तेः
भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेता हैं। उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना थी, लेकिन वे जगह नहीं बना पाए।
उनकी जगह अनुसूचित जाति से आने वाले थावरचंद गेहलोत को मंत्रीपद मिल गया है। मालवा-निमाड़ से आने वाले गेहलोत की संगठन में अच्छी पकड़ रही है।
चूंकि प्रदेश में पार्टी के सामने फिलहाल कोई बड़ी चुनौती नहीं है, भाजपा ने अभूतपूर्व सफलताएं हासिल की हैं, इसलिए फग्गनसिंह कुलस्ते को अध्यक्ष पद दिया जा सकता है।
नंदकुमार सिंह चौहानः
राजपूत नेता हैं। खंडवा से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव को हराकर संसद पहुंचे हैं।
उनकी खासियत यह है कि वह सबके करीबी हैं। नरेंद्र सिंह तोमर और शिवराज सिंह चौहान से उनकी बड़ी निकटता है। प्रभात झा से भी उनकी खूब पटती है।
कैलाश विजयवर्गीय ने तो खंडवा में उनके चुनाव का संचालन भी किया है। नंदू भैया के नाम से पहचाने जाने वाले नंदकुमार सिंह के पक्ष में भी कई समीकरण हैं।
अनिल माधव दवेः
राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे आरएसएस से आने वाले भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार हैं।
अलबत्ता मुख्यमंत्री से उनके समीकरण उतने अच्छे नहीं बताए जाते जितने कुलस्ते या नंदकुमार सिंह के हैं।
अगर प्रदेशाध्यक्ष का फैसला दिल्ली में हुआ तो अनिल माधव दवे अग्रणी होंगे।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्रीपद छोड़कर प्रदेश अध्यक्ष बनने में कैलाश विजयवर्गीय शायद ही दिलचस्पी दिखाएं।
पार्टी द्वारा अध्यक्ष पद दिए जाने की स्थिति पर वह मनोरंजक टिप्पणी कर चुके हैः पार्टी चाहे तो वार्ड अध्यक्ष भी बन जाएंगे, प्रदेशाध्यक्ष क्या? कैलाश विजयवर्गीय की संभावनाएं इस दौड़ में सबसे कम है।