kamal nath-digvijay singh- Jyotiraditya scindia
कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने समर्थकों को महत्वपूर्ण मंत्रालय देने पर अड़े थे। विभागों को लेकर फंसा यह पेंच दिल्ली दरबार के दखल के बाद सुलझा। शुक्रवार को घंटों तक गृह, वित्त, नगरीय प्रशासन आदि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर सबसे ज्यादा माथापच्ची हुई। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ से बात करने के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।
अनुभवी कमलनाथ को अनुभव पसंद है
विभागों के बंटवारे में अनुभव को तरजीह दी गई है। दिग्विजय सरकार में मंत्री रह चके ब्रजेंद्र सिंह राठौर को वाणिज्यिक कर जैसा महत्वप्पोरन मंत्रालय सौंपा गया है। वहीं एमबीबीएस डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधौ को मेडिकल एजूकेशन और सज्जन सिंह वर्मा को लोक निर्माण विभाग दिया है। इसके अलावा दिग्विजय सिंह की पसंद डॉ. गोविंद सिंह को उनका पसंदीदा सहकारिता विभाग मिला है।
युवा जोश को महत्वपूर्ण जिम्मा
कमलनाथ ने अपने मंत्रिमडल के युवा मंत्रियों पर भी भरपूर भरोसा दिखाया है। पिछली सरकारो में जयंत मलैया के पास रहा वित्त विभाग तरुण भनोट को सौंपा है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर जिस नगरीय विकास विभाग को संभाल चुके हैं वह काम दिग्विजय के लाल जयवर्द्धन सिंह को मिला है।
महाकौशल को मिली मायूसी
विभागों के बंटवारे में महाकौशल को मायूसी ही हाथ लगी। लखन घनघोरिया को मिले सामाजिक न्याय और ओमकार सिंह मरकाम को जनजातीय मामलों के मंत्रालय और निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को खनिज साधन विभाग दिया गया है। जनता से सीधा सरोकार रखने वाले अहम मंत्रालय के मामले में महाकौशल पिछड़ गया।
विभागों के बंटवारे में चला राहुल का राज
जहां एक ओर दिग्विजय अपने बेटे जयवर्धन के लिए वित्त विभाग चाहते थे वहीं दुसरे नेताओं को इसपर आपत्ति थी। आपत्ति की वजह जयवर्धन का अनुभव हीं होना था। उनके मुताबिक परदे के पीछे से दिग्विजय ही विभाग में हस्तक्षेप करते। राहुल गांधी के निर्देश पर अहमद पटेल ने इस विवाद को बातचीत से सुलझाया और तब जाकर जयवर्द्धन को नगरीय विकास और आवास विभाग देने पर सहमति बनी। यह विभाग पहले तरुण भनोट को दिए जाने की खबर थी।
बदनावर विधायक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने पार्टी में वंशवाद का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफे की धमकी दी थी जिसके बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया है। दत्तीगांव शनिवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे। एक दिन पहले ही दत्तीगांव ने कहा था कि कहा कि क्षेत्र की जनता को इस बार उनके मंत्री बनने की उम्मीद थी मगर वंशवाद की वजह से उनका हक छीन लिया गया।
मैं इस अन्याय का बदला इस्तीफे से दूंगा। मंत्री बनने का मुझे शौक नहीं बल्कि यह मेरा हक है। अगर मैं किसी बड़े नेता या पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा होता तो जरूर मंत्री बनता।
बदनावर सीट से राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने 41 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। इसके अलावा विधायक केपी सिंह की ज्योतिरादित्य से भेंट करने की खबर है।