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एमपी में संत रविदास जयंती पर सियासत: सारंग बोले कमलनाथ को 15 महीने की सरकार में महापुरुष क्यों याद नहीं आए

Mon, 14 Feb 2022 01:22 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश सरकार समेत भाजपा 16 फरवरी को पूरे प्रदेश में संत रविदास जयंती पर अलग-अलग जगह कार्यक्रम करने वाली है। अब कांग्रेस भी संत रविदास जयंती पर कार्यक्रम करेंगी। इस पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने निशाना साधते हुए कहा कि कमलनाथ को 15 महीने की सरकार में महापुरुषों की याद क्यों नहीं आई। 
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विश्वास सारंग ने कमलनाथ सहित कांग्रेस पर निशाना साधा है। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में संत रविदास जयंती मनाने को लेकर सियासत शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार समेत भाजपा 16 फरवरी को पूरे प्रदेश में संत रविदास जयंती पर अलग-अलग जगह कार्यक्रम करने वाली है। अब कांग्रेस भी संत रविदास जयंती पर कार्यक्रम करेंगी। कांग्रेस के रविदास जयंती मनाने पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने निशाना साधते हुए कहा कि कमलनाथ को 15 महीने की सरकार में महापुरुषों की याद क्यों नहीं आई।
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विश्वास सारंग ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी सरकार रविदास जयंती पहले से मनाते आ रही है। हम सभी महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते आए हैं, जिससे  आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा ले सकें। कांग्रेस अब हमारी नकल कर रही है। कांग्रेस का यह चुनावी एजेंडा है। कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के लिए इस तरह के कार्यक्रम करती है। यदि कमलनाथ और कांग्रेस को रविदास जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करना ही था तो 15 महीने की सरकार में महापुरुषों के कार्यक्रम आयोजित क्यों नहीं किए।

पब्लिक है सब जानती है
हमने भगवान बिरसा मुंडा को याद करने कार्यक्रम किया तो कमलनाथ ने उसे फिजूल खर्ची बताया। कांग्रेस की सरकार में नेहरू परिवार का महिमा मंडन हो तो वह फिजूल खर्ची नहीं होता है। यह कांग्रेस का चुनावी एजेंडा है। लेकिन यह जनता है सब जानती है। यदि चुनाव को मद्देनजर रखते हुए आप कुछ करते हो तो आपको सफलता कभी नहीं मिलती है। बता दें कांग्रेस भी पूरे प्रदेश में संत रविदास जयंती पर कार्यक्रम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सागर के कार्यक्रम में शामिल होंगे।
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भाजपा-कांग्रेस की 2023 पर नजर
प्रदेश की राजनीति में दलित वोटर महत्वपूर्ण भूमिका में है। यहां की 35 सीटे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वहीं, करीब 80 सीटों पर अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रभाव है। वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा को 19 सीटों ओर कांग्रेस को 16 सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में अब दोनों ही पार्टियों 2023 के चुनाव में दलित वोटर को साधने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है।
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