विश्व विख्यात हीरों की नगरी पन्ना की रत्नगर्भा धरती लोगों पर मेहरबान है। लोगों को रास्ते चलते-चलते हीरे मिल रहे हैं। बुधवार को भी हीरा कार्यालय में दो हीरे जमा किए गए हैं। एक हीरा छतरपुर जिले के पथरगुवां गांव के निवासी मजदूर को रास्ते में चलते-चलते हीरा मिल गया तो दूसरे मजदूर को हीरापुर टपरियन में खदान से हीरा मिला है।
बता दें कि पन्ना जिले की रुंझ नदी में अभी भी बड़ी संख्या में लोग हीरे की तलाश कर रहे हैं। साथ-साथ अब लोगों को पन्ना में रास्ते चलते हीरे मिल रहे हैं। बुधवार को पन्ना के हीरा कार्यालय में वृंदावन कुशवाहा निवासी पथरगुवां जिला छतरपुर मजदूर को पन्ना नगर के कमलाबाई तालाब के समीप रास्ते मे चलते-चलते 4.86 कैरेट को हीरा मिला। उसने हीरे को कार्यालय में जमा कराया है।
वहीं, दस्सु कोंदर निवासी गढ़ा जिला छतरपुर को पन्ना की हीरापुर टपरियन की खदान से 3.40 कैरेट बेश कीमती हीरा मिला है, जिसे हीरा कार्यालय में जमा करवा दिया गया है। यह दोनों हीरे जैम क्वालिटी के हैं। आगामी हीरा नीलामी में रखे जाएंगे।
एक साल में मिले 137 हीरे...
पन्ना जिले में एक साल में नौ लोगों को रास्ते में हीरे पड़े मिले हैं। 1.41 कैरेट समीर सिंह, 4.39 कैरेट गेंदा बाई, 2.83 कैरेट नंदी लाल, 0.85 कैरेट छोटेलाल, 1.30 कैरेट नीरू पाल, 2.00 कैरेट पन्नालाल कुशवाहा, 2.85 कैरेट भवानी दीन रैकवार, 1.36 राजकिशोर सिंगरौल और 4.86 कैरेट वृंदावन रैकवार को हीरा मिला है। इन नौ हीरों का वजन 21.85 कैरेट है। अनुमानित कीमत एक करोड़ से ज्यादा है। एक साल में कुल 137 हीरा कार्यालय में जमा करवाए गए हैं, जिनका वजन 295.71 कैरेट है।
सरकार देगी 12.50 प्रतिशत का हिस्सा...
जिसके खेत में हीरा या अन्य कीमती चीजें मिलती हैं तो सरकार उसे 12.50 प्रतिशत राशि देती है, लेकिन कोई दावा करता है कि खुदाई के दौरान मिला खजाना उसका है तो फिर मामला कोर्ट में जाता है। फिर कोर्ट में साबित करने के बाद खुदाई के दौरान मिली चीजें उसकी हो जाती हैं। खुदाई के दौरान मिली चीजों के बारे में अगर कोई जानकारी छिपाता है तो वह कानूनी पचड़े में पड़ सकता है। पुलिस उसके खिलाफ एक्शन ले सकती है।