मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में जून माह से 5200 गांवों में प्राकृतिक खेती शुरू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सोमवार को नवोन्मेषी खेती पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में देसी गायों की देखरेख के लिए सरकार किसानों को प्रतिमाह 900 रुपये की मदद भी देगी। चौहान ने कहा कि विभिन्न फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ा है। रासायनिक उर्वरकों के बहुत अधिक इस्तेमाल के कारण मृदा की ‘सेहत’ खराब हुई है जिसे रोकने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार उर्वरक सब्सिडी के लिए किसानों को 1.8 लाख करोड़ रुपये देती है और इसी तरह प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने तय किया है कि हर 1 जिलों में कम से कम 100 गांव, ऐसे 52 जिलों में 5200 गांव में खरीफ की फसल की प्राकृतिक खेती की ओर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि आप लोगों को उपदेश देते हैं तो अमल स्वयं से प्रारंभ करें, इसलिए मैंने स्वयं के खेत में पांच एकड़ में प्राकृतिक खेती शुरू की है। मैंने अपने मंत्री मित्रों से भी थोड़ी-थोड़ी जमीन पर प्राकृतिक खेती करने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्राकृतिक कृषि का विजन, धरती के संरक्षण का विजन है। यह धरती आने वाली पीढ़ियों के लिए भी रहने लायक बची रहे। इसलिए मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक कृषि बोर्ड का गठन किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्य प्रदेश के प्रयास रंग लाए और सिंचाई का रकबा बढ़ा। विगत वर्ष कृषि का उत्पादन बढ़ा। हमने गेहूं के उत्पादन में पंजाब, हरियाणा को पीछे छोड़ दिया। लेकिन मुझे यह बताने में कोई संकोच नहीं है कि केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग लगातार बढ़ता चला गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जनजातीय क्षेत्रों के किसान अभी भी गोबर की खाद का उपयोग करते हैं। रासायनिक खादों के उपयोग से बहुत खतरे सामने आ रहे हैं। इसके उपयोग को रोकने का समय आ गया है। मध्य प्रदेश जैविक खेती को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहा है।