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Gwalior: बापू की हत्या की साजिश हिंदू महासभा के गढ़ में रची गई थी, गोडसे ने यहीं ली थी तमंचा चलाने की ट्रेनिंग

Mon, 30 Jan 2023 03:36 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मध्य प्रदेश

सार

गोडसे ने गांधी की हत्या करने के लिए ग्वालियर में हिंदू महासभा के नेता डॉ. परचुरे और गंगाधर दंडवत की मदद ली थी। उसने शिंदे की छावनी से पिस्टल खरीद कर हत्या की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद 30 जनवरी की शाम को गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला भवन जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सीने में तीन गोलियां दाग दीं थी।
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महात्मा गांधी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 को भारत के इतिहास में काला दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन शाम को दिल्ली के बिड़ला भवन में महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने हत्या कर दी थी। बापू जब प्रार्थना सभा से उठ रहे थे तो उसी दौरान उनके सीने को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। गोडसे ने बापू की हत्या की साजिश की पटकथा प्रदेश के ग्वालियर में ही रची थी।

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20 जनवरी को हत्या की कोशिश हो गई थी नाकाम
ग्वालियर शुरू से ही हिंदू महासभा का गढ़ रहा है, जहां आज भी गोडसे को देवता की तरह पूजा जाता है। उन दिनों गोडसे के सहयोगी ग्वालियर आते-जाते रहते थे। 20 जनवरी 1948 को गांधी की हत्या की नाकाम कोशिश के बाद गोडसे ग्वालियर आया और यहां कुछ दिन रहा। कुछ दिनों बाद गोडसे ने अपने साथियों के बदले खुद ही गांधी की जान लेने की तैयारी की। 

गोडसे ने ग्वालियर में हिंदू महासभा के नेता के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। गांधी की हत्या करने में गोडसे की मदद डॉक्टर परचुरे और उनके परचित गंगाधर दंडवत ने की। ग्वालियर में शिंदे की छावनी वो जगह थी जहां से पिस्टल खरीदी गई थी। यहीं पर नाथूराम को महात्मा गांधी की जान लेने का प्रशिक्षण भी दिया गया था।
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नाथूराम गोडसे ने ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी के किनारे बंदूक चलाने की ट्रेनिंग ली। जब नाथूराम गोडसे ने बंदूक चलाने का प्रशिक्षण ले लिया तो उसके बाद 29 जनवरी की सुबह नाथूराम गोडसे ग्वालियर रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर दिल्ली के लिए रवाना हो गया। 

बापू की हत्या पर हिंदू महासभा ने मनाई थी खुशी
इसके बाद 30 जनवरी की शाम होते ही गोडसे दिल्ली के बिड़ला भवन पहुंचा। बाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सीने में तीन गोलियां दाग दीं। गोली की इस गूंज से पूरे देश में सन्नाटा छा गया, चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। पूरा देश शोक में डूब गया। जबकि हिंदू महासभा ने इस हत्या को अपनी जीत मान कर काफी खुशी मनाई।

ग्वालियर में हिंदू महासभा के सदस्य आज भी महात्मा गांधी की हत्या को एक मिशन के रूप में मानते हैं। उनका कहना है कि नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी को मारना एक मिशन था और एक मिशन के तहत ही नाथूराम गोडसे ग्वालियर आए थे। 

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